सीएम सुक्खू का परिवार भी प्रदेश के उस वर्ग में शामिल हो गया, जहां परिवार के लोग राजनीति में हैं, देहरा में आदर्श आचार संहिता लागू, अधिसूचना बाद में जारी होगी, कमलेश ठाकुर को हमीरपुर से, भाजपा के अनुराग ठाकुर के सामने कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की थी चर्चा।
देहरा – शिव गुलेरिया
हिमाचल प्रदेश की तीन सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने हैं। देहरा विधासनभा सीट पर कांग्रेस ने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। यहां से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव लड़ेंगी। पत्नी को टिकट तो मिल गया, लेकिन यह सीट सीएम सुक्खू की प्रतिष्ठा का सवाल बन गई। आखिर क्या है जोखिम?
जैसी चर्चा थी, अंतत: उसी के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर का चुनावी राजनीति में प्रवेश हो गया। वह देहरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी होंगी। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के चौथे दिन कमलेश के नाम की घोषणा होते ही मुख्यमंत्री सुक्खू का परिवार भी प्रदेश के उस वर्ग में शामिल हो गया, जहां परिवार के लोग राजनीति में हैं।
जैसी चर्चा थी, अंतत: उसी के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर का चुनावी राजनीति में प्रवेश हो गया। वह देहरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी होंगी। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के चौथे दिन कमलेश के नाम की घोषणा होते ही मुख्यमंत्री सुक्खू का परिवार भी प्रदेश के उस वर्ग में शामिल हो गया, जहां परिवार के लोग राजनीति में हैं।
हालांकि देहरा में आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए अधिसूचना बाद में जारी होगी। हाल में संपन्न संसदीय चुनाव में भी कमलेश ठाकुर को हमीरपुर से, भाजपा के अनुराग ठाकुर के सामने कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा थी किंतु ऐसा नहीं हुआ और वहां ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा को अवसर दिया गया।
कमलेश ठाकुर का कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है। इसके बावजूद उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने को कई कोणों से समझा जा रहा है। पहला कोण, मुख्यमंत्री का आत्मविश्वास है। वह दिखाना चाहते हैं कि वह राजनीतिक जोखिम उठाने को तैयार हैं। वह पत्नी को विधायक बना कर कांगड़ा की उपेक्षा की धारणा भी तोड़ना चाहते हैं। हालांकि इस समय 65 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 38 सदस्य हैं जबकि भाजपा के 27 विधायक हैं।
भाजपा तो इसे परिवारवाद कह ही रही है किंतु कांग्रेस के भी कुछ लोगों का मानना है कि अब यह सीट मुख्यमंत्री के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। क्योंकि जीतने की स्थिति में तो ठीक किंतु यदि यहां कमलेश हारीं तो समझा जाएगा कि मुख्यमंत्री हारे।
यहां से दो बार से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह जीतते आ रहे हैं। 2022 में जीते होशियार सिंह ने अन्य दो विधायकों नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा के साथ राज्यसभा चुनाव में अभिषेक मनु सिंघवी के विरोध में मत दिया था। इन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दिया था इसलिए उपचुनाव हो रहा है।
मुख्यमंत्री इन पर राज्यसभा का वोट बेचने का आरोप लगाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस के छह लोग बागी हुए, उनकी बात और है किंतु निर्दलीय विधायकों ने त्यागपत्र देकर भाजपा का दामन क्यों थामा।
उधर, विधायकों का कहना है कि मुख्यमंत्री उन्हें समय नहीं देते थे, न मांगें मानते थे। जिन डाक्टर राजेश शर्मा को टिकट नहीं मिला, वह पिछली बार कांग्रेस को सम्मानजनक मत दिला गए थे। 2012 में यहां कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी। इससे पूर्व छह बार मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की पत्नी पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह वर्तमान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं। इनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद प्रेम कुमार धूमल भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं जिनके पुत्र अनुराग ठाकुर मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं और हमीरपुर से सांसद हैं। मंडी में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय पंडित सुखराम के पुत्र अनिल शर्मा मंडी विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं। अनिल शर्मा भाजपा व कांग्रेस दोनों ही सरकारों में मंत्री रहे हैं। अनिल शर्मा के पुत्र आश्रय शर्मा ने भी मंडी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था।
प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे जगदेव ठाकुर के बेटे नरेंद्र ठाकुर व बहू उर्मिल ठाकुर विधायक रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पौत्र रोहित ठाकुर प्रदेश के शिक्षा मंत्री हैं। इसके अलावा भी कई परिवार हैं।
नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए पहला नामांकन कांग्रेस प्रत्याशी हरदीप बावा बुधवार को करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल, रोहित ठाकुर, सीपीएस राम कुमार भी शामिल रहेंगे।
भाजपा प्रत्याशी केएल ठाकुर 20 जून को नामांकन करेंगे। मंगलवार को केएल ठाकुर, राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी व डा. राजीव सैजल पूर्व प्रत्याशी रहे लखविंदर राणा से मिलने उनके घर पहुंचे।

