बॉर्डर पर लगने वाले स्पेशल टैक्स को लेकर भड़के पंजाब के टैक्सी ऑपरेटर, हिमाचल सरकार मुर्दाबाद के लगाए नारे

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हिमाचल प्रवेश द्वार पर लगने वाले स्पेशल टैक्स को लेकर भड़के पंजाब के टैक्सी ऑपरेटर, कर्मियों ने हिमाचल सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए, उन्होंने सरकार से टैक्स वापस लेने की मांग की, नए टैक्स के तहत 3000 से 6000 रूपये प्रतिदिन प्रदेश सरकार के देने होंगे।

सोलन – रजनीश ठाकुर

हरियाणा व हिमाचल के बॉर्डर परवाणू पर टैक्सी ऑपरेटरों ने धरना प्रदर्शन कर हिमाचल सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। इसके साथ ही प्रदेश की सभी सीमाओं को भी जल्द सील करने की चेतावनी जारी की है।

ऐसा उन्होंने हाल ही में लगाए गए स्पेशल टैक्स को लेकर किया है। नए टैक्स से बाहरी राज्यों से आने वाले ऑपरेटरों को किराये के बराबर टैक्स पेय करना पड़ेगा, इसका विरोध बाहरी राज्यों के ऑपरेटर इन दिनों कर रहे हैं।

पंजाब की आजाद टैक्सी यूनियन कर रही हिमाचल सरकार का विरोध

परवाणू बाईपास पर हिमाचल के प्रवेश द्वार पर स्थित टोल बैरियर पर पंजाब की आज़ाद टैक्सी यूनियन ने हिमाचल सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया।

दरअसल हिमाचल सरकार की ओर से बाहरी राज्यों से आने वाली टेम्पो ट्रैवलर व उनसे बड़े ट्रांसपोर्ट वाहनों पर प्रवेश शुल्क 1 सितम्बर से लागू किया गया है। जिसके अनुसार बाहर से आने वाले वाहनों को जो आल इंडिया परमिट धारक नहीं हैं। उन्हें 3000 से 6000 रूपये प्रतिदिन प्रदेश सरकार को देने होंगे।

सरकार से टैक्स वापस लेने की मांग की

वहीं, ऑल इंडिया परमिट वाले वाहनों को 4000 रूपये प्रतिदिन से लेकर 50000 रूपये प्रतिमाह सरकार को देने होंगे, जिसको लेकर पंजाब हरियाणा व अन्य राज्यों के टैक्सी चालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया दिया है।

आजाद टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शरणजीत सिंह कलसी द्वारा टोल बैरियर पर एसडीएम कसौली गौरव महाजन को ज्ञापन सौंपा तथा सरकार से टैक्स वापस लेने की मांग की।

यूनियन कर्मियों ने टैक्स को बताया गुंडा टैक्स

यूनियन कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की तथा सरकार के टैक्स गुंडा टैक्स बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

इस बारे में यूनियन के अध्यक्ष शरणजीत सिंह ने बताया की उन्होंने सरकार के मनमाने टैक्स के खिलाफ ज्ञापन दिया है तथा मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा की जब हम ऑल इंडिया परमिट पर केंद्र सरकार को 80000 /- प्रतिवर्ष देते हैं तो राज्य सरकारें अपनी मर्जी से टैक्स कैसे लगा सकती हैं।

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