पौंग से खदेड़े भैसें चराने आए दूसरे राज्यों के गुज्जर, बिना बताए जमाया था डेरा

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नगरोटा सुरियाँ – शिव गुलेरिया

पौंग झील के किनारे बरियाल पंचायत में भैंसों को चराने के लिए डेरा लगाकर बैठे दूसरे राज्यों के गुज्जरों को पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर खदेड़ दिया है।

हर साल दूसरे राज्यों से सैकड़ों की तादाद में गुज्जर भैंसे चराने के लिए पौंग झील के प्रतिबंधित क्षेत्र में डेरा जमा कर बैठ जाते हैं और न ही इन दूसरे राज्य से आने वाले गुज्जरों की कोई पहचान इत्यादि होती।

इनके बीमार मवेशी इतनी संख्या में होते हैं कि स्थानीय किसानों के पशु भी बीमार हो जाते हैं और कुछ तथाकथित लोग अपनी निजी भूमि बता कर गुज्जरों से पैसा भी ऐंठ लेते हैं। ऐसा ही किस्सा बरियाल पंचायत में देखने को मिला था।

पंचायत के एक व्यक्ति ने गुज्जरों को अपनी जमीन बताकर डेरा लगवा दिया, लेकिन आज पूरा प्रशासन पटवारी कानूनगो सहित वहां पहुंचा और जिस भूमि पर गुज्जरों ने डेरा लगाया था, वह पौंग डैम की थी, जिसके चलते उन्हें वहां से हटा दिया गया।

गुज्जरों को वहां से पहले शांतिपूर्ण तरीके से हटने को कहा, लेकिन जब गुज्जर आनाकानी करने लगे तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता देख पुलिस प्रशासन ने गुज्जरों को स्थानीय जनता के सहयोग से बलपूर्वक खदेड़ दिया।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि यह गुज्जर नहीं हटते तो उन्हें हम बलपूर्वक हटा देंगे, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा बड़े ही शांतिपूर्ण तरीके से इन्हें वहां से हटाकर इनके ट्रैक्टर पर सामान इत्यादि रखवा कर वहां से भेज दिया।

पंचायत प्रधान गुरदयाल सिंह ने कहा कि पौंग झील का खाली क्षेत्र वन्य प्राणी अभ्यारण्य होने के कारण सभी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित है और राजनीतिक संरक्षण के चलते दूसरे राज्यों के गुज्जर डेरा डाल कर स्थानीय ग्रामीणों के साथ झगड़ा करते हैं।

जितने भी यह गुज्जर आप बाहर से आए हुए हैं, इनका कोई अता-पता नहीं है, कहीं चंबा जैसी घटना यहां पर न हो, इसलिए लोगों में भारी रोष है।

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