शेष है

--Advertisement--

Image

हिम खबर – डेस्क 

मृत्यु का पता नहीं, मगर श्रेष्ठ जीवन अभी शेष है।

नफ़रत का पता नहीं, मगर मोहब्बत की अभिलाषाअभी शेष है।

आत्मसमर्पण का पता नहीं, मगर आत्मबलिदान का बोध अभी शेष है।

मन में पनपते क्रोध का पता नहीं, मगर ह्रदय के आँचल में शांति, अभी शेष है।

आत्मग्लानि का पता नहीं, मगर आत्म साक्षातकार का बोध, अभी शेष है।

जीवन में लगी ठोकरओं का पता नहीं, मगर खड़े होकर मार्ग पर चलना, अभी शेष है।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक)

राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गाहलिया पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश,

9876777233 rajivdogra1@gmail.com

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

जब राजा ने भगवान को सौंप दिया सिंहासन, फिर शुरू हिमाचल का सबसे बड़ा उत्सव, दुनिया भी हो गई दीवानी

कुल्लू दशहरा हिमाचल की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं...

रणजी ट्रॉफी के लिए हिमाचल की टीम घोषित, कांगड़ा के 4 खिलाड़ियों को मिली जगह

रणजी ट्रॉफी के लिए हिमाचल प्रदेश की 15 सदस्यीय...

चालक को आई नींद की झपकी! रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे पर पलटा बीयर की पेटियों से लदा ट्रक

रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे पर बीयर की पेटियों से लदा एक...