हिमखबर डेस्क
प्रतिभा उम्र, संसाधनों या बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। यदि सोच बड़ी हो और कुछ नया करने का जुनून हो, तो छोटे से गांव से भी बड़ी क्रांति की शुरुआत हो सकती है। बिहार के बक्सर जिले के बरुणा गांव के रहने वाले महज 13 वर्षीय आकाश मौर्य ने इसे सच साबित कर दिखाया है।
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले आकाश ने अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसा AI आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो भविष्य में देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। आकाश ने अपने साथियों राहुल, अंकित और अजीत के साथ मिलकर ‘कमांड सेंटर एंड लाइव लिंक’ नाम का स्मार्ट सॉफ्टवेयर विकसित किया है।
यह सिस्टम स्कूल प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम करता है। इस सॉफ्टवेयर की सबसे खास विशेषता यह है कि स्कूल परिसर में प्रवेश करते ही शिक्षकों की उपस्थिति स्वतः दर्ज हो जाती है।
वहीं, कक्षा में प्रवेश करते ही शिक्षकों के मोबाइल पर सोशल मीडिया और अन्य गैर-जरूरी ऐप्स लॉक हो जाते हैं, जिससे पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान न आए। यही नहीं, इस डिजिटल सिस्टम के माध्यम से अभिभावक बारकोड स्कैन कर घर बैठे फीस जमा कर सकते हैं।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक यह भी विश्लेषण करती है कि किन विद्यार्थियों की फीस लंबित है और संबंधित अभिभावकों को समय पर सूचना भेजी जा सकती है। मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC), उपस्थिति और अन्य स्कूल रिकॉर्ड भी कुछ ही क्लिक में उपलब्ध हो जाते हैं।
बताया जा रहा है कि यह सॉफ्टवेयर हिंदी, अंग्रेजी सहित पांच भाषाओं में काम करता है और छह से अधिक स्कूलों में इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। आकाश की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उनके जुड़वा भाई अंकू मौर्य भी कम प्रतिभाशाली नहीं हैं। महज 13 वर्ष की उम्र में वह देश की प्रतिष्ठित UPSC परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं।
बरुणा गांव के इन दोनों भाइयों ने साबित कर दिया है कि यदि सपने बड़े हों और मेहनत सच्ची हो, तो गांव की मिट्टी से भी ऐसे सितारे निकलते हैं, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाते हैं।
आज आकाश मौर्य की यह उपलब्धि न केवल बिहार, बल्कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों के लिए यह संदेश है कि नवाचार और लगन से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

