समाजसेवी होने के नाते विधायकों को खुद ही करना चाहिए अंधाधुंध मिलने वाली वित्तीय सुविधाओं का त्याग

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दूराना – राजेश कुमार

पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने हिमाचल में विधायकों को दी जाने वाली अंधाधुंध वित्तीय सुविधाओं पर चुटकी लेते हुए कहा कि समझ में नहीं आता है कि आखिर हमारे समाजसेवी विधायक सब कुछ मुफ्त एवं सस्ती वित्तीय सुविधाएं सरकारी खजाने से लेना अपना मौलिक अधिकार क्यों समझ बैठे हैं।

सरकार द्वारा विधायकों को सैर सपाटे सहित करोड़ों रुपए सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज गाडियां एवं घर बनाने के लिए देने की घोषणाएं करने से पहले सरकार को समझना चाहिए कि आखिर ऐसा कौन सा पूर्व एवं वर्तमान विधायक है जिसके पास आलिशान बंगले एवं एलेगजरी गाडियां उपलब्ध नहीं हैं।

तो फिर यह घर और गाड़ियों के लिए सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज लेकर किसके लिए घर और गाड़ियों की खरीददारी करेंगे। जबकि करोड़ों के कर्ज में डुबी हुई सरकार कर्मचारियों एवं पैंनशनरों की वकाया राशि का भुगतान अभी तक नहीं कर पाई है और कर्मचारियों की पुरानी पैंशन देने में वित्तीय आधार पर असमर्थता व्यक्त कर रही है।

तो फिर आए दिन विधायकों को वित्तीय अथाह सहायता जैसी सुविधाएं कौन से सरकारी खजाने से देने की घोषणाएं सरकार कर रही है ।

अतः विधायकों को समाजसेवी होने के नाते जनहित में सरकारी खजाने से वित्तीय सुविधाएं लेने की बजाए सुविधाएं त्यागने की मिसाल पेश करनी चाहिए न कि आंखें मूंद कर जनता के पैसों को अपने ऐशो आराम पर खर्च करते रहना चाहिए ताकि जनता के बीच समाजसेवी होने का संदेश दिया जा सके।

साधू राम राणा ने आगे कहा कि मैंने पिछले चालीस सालों से सरकार से मिलने वाला सस्ता राशन सरकारी डीपो से नहीं लिया है और माननीय प्रधानमंत्री मोदी की गैस सब्सिडी छोड़ने की पहली अपील पर गैस सब्सिडी लेना छोड़ दी है।

इसके साथ ही पूर्व में पंचायत समिति सदस्य के रूप में मिलने वाला मानदेय और वर्तमान में उपप्रधान के पद पर मिलने वाले मानदेय को शत प्रतिशत अपने लिए खर्च न करते हुए जरुरतमंदों पर खर्च कर रहा हूं जबकि हमारे माननीय विधायक इस प्रकार की कोई भी मिसाल पेश करते हुए नहीं दिख रहे हैं।

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