शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में एक रोचक राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। शाहपुर की नगर पंचायत चुनावी तस्वीर ने इस बार स्थानीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। सात वार्डों वाली नगर पंचायत में जनता ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया और सबसे अधिक भरोसा निर्दलीय उम्मीदवारों पर जताया। परिणामों में चार सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि कांग्रेस को दो और भाजपा को केवल एक सीट मिली।
लेकिन राजनीतिक समीकरणों का सबसे बड़ा मोड़ अध्यक्ष पद के आरक्षण ने पैदा कर दिया है। अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित होने के कारण पूरे सदन में इस श्रेणी से निर्वाचित होने वाली एकमात्र पार्षद भाजपा की बबिता हैं। ऐसे में संख्या बल कम होने के बावजूद अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा लगभग तय माना जा रहा है।
शाहपुर नगर पंचायत का चुनावी गणित
- कुल वार्ड : 7
- बहुमत का आंकड़ा : 4
- निर्दलीय विजेता : 4
- कांग्रेस विजेता : 2
- भाजपा विजेता : 1
विजयी उम्मीदवारों की सूची
- वार्ड नंबर 1 : अभिषेक माथुर – निर्दलीय
- वार्ड नंबर 2 : अनुपम – निर्दलीय
- वार्ड नंबर 3 : बबिता – भाजपा
- वार्ड नंबर 4 : प्रीति परिहार – निर्दलीय
- वार्ड नंबर 5 : राजीव पटियाल – कांग्रेस
- वार्ड नंबर 6 : नितिन कौशल – निर्दलीय
- वार्ड नंबर 7 : विजय सिंह गुलेरिया – कांग्रेस
एक सीट के बावजूद भाजपा क्यों मजबूत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिणाम “संख्या बनाम व्यवस्था” की स्थिति पैदा कर रहा है। सदन में भाजपा की केवल एक सीट होने के बावजूद अध्यक्ष पद के लिए कानूनी तौर पर सबसे मजबूत स्थिति उसी की बन गई है।
चूंकि अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित है और भाजपा की बबिता ही इस वर्ग से निर्वाचित पार्षद हैं, इसलिए उनके सामने किसी अन्य उम्मीदवार के उतरने की संभावना नहीं दिख रही। यही वजह है कि शाहपुर नगर पंचायत में सत्ता संचालन की चाबी भाजपा के हाथों में जाती नजर आ रही है।
कांग्रेस का बहुमत का दावा पर राह मुश्किल
चुनाव परिणामों के तुरंत बाद पांच विजयी प्रत्याशी कांग्रेस खेमे के साथ दिखाई दिए। सभी ने विधायक केवल सिंह पठानिया से मुलाकात की, जिसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि नगर पंचायत में पांच पार्षद पार्टी समर्थित हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बहुमत का दावा करने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष पद हासिल नहीं कर पाएगी, क्योंकि आरक्षण व्यवस्था उसके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा है। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए कांग्रेस समर्थित गुट को भाजपा की बबिता के नाम पर सहमति देनी पड़ सकती है।
अब उपाध्यक्ष पद पर होगी असली सियासी लड़ाई
अध्यक्ष पद लगभग तय माने जाने के बाद अब निगाहें उपाध्यक्ष पद पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित पार्षद इस पद के लिए रणनीति तैयार करेंगे। आने वाले दिनों में राजनीतिक जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कवायद और तेज हो सकती है।
…बदले थे तीन अध्यक्ष
यहां पर बता दें कि पिछली बार नगर पंचायत शाहपुर में तीन अध्यक्ष बदले गए थे, लेकिन कांग्रेस समर्थित विजय गुलेरिया लगातार पांच साल तक उपाध्यक्ष बने रहे थे। इस बार काफी बड़े अंतर से जीतकर आए विजय गुलेरिया और राजीव पटियाल की उपाध्यक्ष बनने की प्रवल संभावनाएं हैं। क्योंकि एक तरफ विजय गुलेरिया लगातार पांच साल तक उपाध्यक्ष रहे वहीं राजीव पटियाल भी पिछले कार्यकाल के दौरान कांग्रेस के मनोनीत पार्षद रह चुके हैं। इन दो को छोड़कर सभी पार्षद पहली बार चुनकर सत्ता में आए हैं।
जीत के बाद जश्न और बैठकों का दौर
परिणाम घोषित होते ही शाहपुर में विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जमकर जश्न मनाया। दूसरी ओर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गईं और विभिन्न गुटों के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया। नगर पंचायत शाहपुर का यह चुनाव परिणाम साफ संकेत दे रहा है कि स्थानीय राजनीति में निर्दलीयों की ताकत बढ़ी है, लेकिन सत्ता का अंतिम संतुलन अब आरक्षण और रणनीतिक गठजोड़ तय करेंगे।

