हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लेंसकार्ट शोरूम में हुआ हंगामे के बाद एफआईआर दर्ज हो गई है। विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। संजौली पुलिस थाना में दर्ज मामले में आरोप है कि कुछ लोगों ने बिना अनुमति स्टोर में घुसकर धार्मिक नारेबाजी की और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 302, 333 और 3(5) के तहत यह मामला दर्ज किया है।
शिकायत में कहा गया है कि 22 अप्रैल की शाम को देव भूमि संघर्ष समिति से जुड़े कुछ पदाधिकारी सहित करीब एक दर्जन लोग संजौली स्थित लेंसकार्ट स्टोर में बिना किसी पूर्व अनुमति के घुस गए।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने स्टोर के अंदर धार्मिक उन्माद से जुड़े नारे लगाए और एक विशेष धर्म के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा पैदा हुआ।

बता दें कि यह घटनाक्रम उस विवाद के बाद सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित दस्तावेज से शुरू हुआ था। उस दस्तावेज में दावा किया गया था कि कंपनी कार्यस्थल पर बिंदी और तिलक की अनुमति नहीं देती, जबकि हिजाब पहनने की इजाजत देती है।
कंपनी के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल पहले ही इस दस्तावेज को “गलत” बता चुके हैं और कह चुके हैं कि यह कंपनी की आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है। विवाद के बीच शिमला में कुछ हिंदू संगठनों ने स्टोर के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
एसपी शिमला गौरव सिंह के बोल
एसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

