बच्चे को पालमपुर अस्पताल में नहीं मिला इलाज, टांडा पहुंचाने में हो गई देर और तोड़ दिया दम

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व्यूरो रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश सरकार स्वास्थ सुविधाओं के नाम पर बड़े दावे करती है लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। यह आरोप सुलह हलके की अरला पंचायत निवासी महिंद्र सिंह ने लगाया है, जिनके 14 वर्षीय बेटे की स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही से मौत हो गई।

महिंद्र गरीब परिवार से संबंध रखता है और वेल्डिंग का काम करता है। उन्होंने बताया रविवार को उनके बेटे की अचानक तबीयत बिगड़ गई तो वह उसे नागरिक अस्पताल पालमपुर ले गए।

मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्‍त है। ऐसे में वह अपने बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में ले जा सकते हैं।

महिंद्र के अनुसार वह बच्चे को पालमपुर स्थित निजी अस्पताल में ले गए। बच्चे की गंभीर स्थिति को देख वहां पर कार्यरत डाक्टरों ने उसे टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

स्वजन ने आरोप लगाया कि नागरिक अस्पताल पालमपुर में बीमार बच्चे को किसी प्रकार का इलाज नहीं दिया गया।

गौर रहे कि पालमपुर अस्पताल में डाक्टरों के कई पद रिक्त हैं, जिससे उपमंडल के हजारों लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि पालमपुर अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ के पद को जल्द भरा जाए, ताकि और किसी नौनिहाल की जान न जाए।

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