पार्किंग में धूल फांक रही दान की एंबुलेंस

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ज्वालामुखी- शीतल शर्मा

श्रद्धालुओं के चढ़ावे के पैसे से साल दर साल शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर प्रशासन की आमदनी तो बढ़ती जा रही है लेकिन लाखों रुपये के दान के बावजूद कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका लाभ लोगों को मिलना तो चाहिए पर लापरवाही की वजह से मिल नहीं पा रहा है। शक्तिपीठ में पांच माह पहले तेजराम धर्मपाल चेरिटेबल ट्रस्ट मौड़ मंडी (पंजाब) की ओर से एक एंबुलेंस दान की गई थी।

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि सिविल अस्पताल ज्वालामुखी में लोगों को इसकी सुविधा अब तक नहीं मिल पाई है। इसे मंदिर प्रशासन की लापरवाही ही कहा जाएगा कि इसे प्रयोग में नहीं लाया जा सका है। एंबुलेंस मिलने के बाद लोगों में उम्मीद जगी थी कि प्रशासन इसे अस्पताल के साथ अटैच कर संयुक्त संचालन करेगा लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

अभी तक यह मंदिर की पार्किंग में धूल फांक रही है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि वह इस वाहन की सेवाएं लेने के लिए तैयार है बशर्ते संचालन का जिम्मा व खर्च मंदिर प्रशासन वहन करे। मंदिर प्रशासन ने इस वाहन के लिए चालक रखने व संचालन में दिलचस्पी नहीं ली है।

पचास पंचायतों के लिए केवल एक एंबुलेंस

सिविल अस्पताल ज्वालामुखी में इस समय क्षेत्र के हजारों लोगों की आपातकाल सुविधा के लिए मात्र एक ही 108 एंबुलेंस सेवा दे रही है। यह एंबुलेंस ज्वालामुखी के साथ जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र की कई पंचायतों के लिए एकमात्र साधन है। यह ज्वालामुखी के चंगर क्षेत्र से बलिहार व जयसिंहपुर हलके की ज्वालामुखी में मिलीं कई पंचायतों के लिए नाकाफी है। कई बार इतने लंबे इलाके से एक मरीज को लाने के लिए गई एंबुलेंस किसी जरूरतमंद के काल करने पर वहां नहीं पहुंच पाती है।

न्यास जल्द लेगा फैसला : जितेंद्रपाल

न्यास सदस्य जितेंद्रपाल दत्ता, देशराज भारती व त्रिलोक चौधरी ने बताया कि पांच माह से खड़ी एंबुलेंस को सही जगह उपयोग में लाया जाए इसके लिए प्रशासन से बात की है। हम चाहते हैं कि दान में आई एंबुलेंस सिविल अस्पताल ज्वालामुखी से कार्य करे। चंगर क्षेत्र की 25 के करीब पंचायतों के लिए आपातकाल वाहन नहीं है, ऐसे में दान में दी गई एंबुलेंस को उसी इलाके को दिया जाए जहां इसकी ज्यादा जरूरत है।

मनोज ठाकुर, एसडीएम ज्वालामुखी एवं मंदिर सहायक आयुक्त के बोल

मंदिर न्यास व प्रशासन ने इस एंबुलेंस को चलाने के लिए प्रस्ताव पारित किया है। इसे रेडक्रास सोसायटी के अधीन चलाने की योजना है, इसका खर्च मंदिर प्रशासन उठाएगा। उपायुक्त कांगड़ा से संस्तुति मिलते ही इसे चलाया जाएगा।

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