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बैंक की नौकरी छोड़ मशरूम उत्पादन में बनाई पहचान, समलोटी के मैकेनिकल इंजीनियर प्रणव धर की सफलता की कहानी

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समलोटी के मैकेनिकल इंजीनियर प्रणव धर ने बैंक की नौकरी छोड़ मशरूम उत्पादन को रोजगार का जरिया बनाया। सरकारी सहायता से उन्होंने मशरूम उत्पादन में सफलता की नई इबारत लिखी।

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की योजनाएं युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खोल रही हैं। कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां विकास खंड के समलोटी निवासी प्रणव धर ने भी सरकारी सहायता का लाभ उठाकर मशरूम उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया है।

प्रणव धर ने उद्यान विभाग के सहयोग से मशरूम ग्रोइंग यूनिट स्थापित की है। यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 मे एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत स्वीकृत हुई है। परियोजना की कुल लागत 60 से 70 लाख रुपये है, जबकि विभाग की ओर से 15 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।

जिला कांगड़ा की तहसील नगरोटा बगवां के समलोटी गांव के प्रणव धर ने इस परियोजना के माध्यम से पारंपरिक खेती के साथ एक आधुनिक और लाभकारी कृषि व्यवसाय को अपनाया है। मशरूम उत्पादन कम भूमि में बेहतर आय की संभावना वाला व्यवसाय माना जाता है और हिमाचल की जलवायु भी इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराती है।

प्रणव का कहना है कि मशरूम उत्पादन का विचार उन्हें अपने परिचितों से मिला, जिन्होंने हरियाणा में बड़े स्तर पर मशरूम फार्म संचालित किए हैं। इसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में संभावनाओं को समझा और उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर अपना प्रोजेक्ट तैयार किया। सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परियोजना को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऐसे प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।
सामलोटी के प्रणव धर की पहल यह दर्शाती है कि आधुनिक कृषि तकनीक, सरकारी सहायता और उद्यमशीलता के मेल से ग्रामीण क्षेत्रों में सफल व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं।

अपने मशरूम ग्रोइंग यूनिट के बारे में बताते हुए प्रणव धर कहते हैं कि ”मैंने प्रदेश सरकार के उद्यान विभाग की मदद से स्थापित किया है। मुझे मशरूम फार्मिंग का आइडिया मेरे कुछ दोस्तों से मिला, जो हरियाणा में बड़े स्तर पर मशरूम का फार्म चला रहे हैं। उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि हिमाचल प्रदेश में भी इस काम की अच्छी संभावनाएं हैं।

इसके बाद मैंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और विभाग के सहयोग से लगभग छह महीने पहले इस फार्म की शुरुआत की। इससे पहले मैं बैंक में पीओ के पद पर काम करता था। मैंने दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन मेरा मन था कि अपने गांव और अपने घर के पास रहकर ही कुछ ऐसा काम किया जाए, जिससे खुद के लिए रोजगार के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल सके।

इसी सोच के साथ मैंने मशरूम फार्मिंग को अपना व्यवसाय बनाया। हमारे फार्म में तीन कमरे हैं। एक कमरे में लगभग 1,600 से 2 हजार मशरूम बैग लगाए जा सकते हैं। एक कमरे से लगभग साढ़े तीन टन तक मशरूम का उत्पादन हो जाता है। इस तरह पूरे वर्ष में हमारी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 50 टन से अधिक है। इस फार्म में हमने स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है।

यहां लगभग 8 से 10 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं। इससे उन्हें अपने गांव के पास ही रोजगार का अवसर मिल रहा है। अगर पिछले छह महीनों की बात करें तो फार्म से लगभग 40 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। कर्मचारियों की सैलरी और अन्य खर्च निकालने के बाद लगभग 20 प्रतिशत का लाभ हमें प्राप्त हुआ है। यानी अब तक करीब 8 से 9 लाख रुपये का मुनाफा हो चुका है।

हमारा मशरूम फार्म पूरे वर्ष चलता है, क्योंकि यह वातानुकूलित है। यहां तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। मशरूम की ग्रोथ और उत्पादन को बेहतर बनाए रखने के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाएं भी यहां उपलब्ध हैं।

मेरा मानना है कि अगर युवा सही जानकारी, तकनीक और सरकारी विभागों के सहयोग के साथ कृषि एवं बागवानी से जुड़े व्यवसाय शुरू करें, तो अपने घर और गांव में रहकर भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं और दूसरों को रोजगार दे सकते हैं।’’

उप निदेशक बागवानी विभाग अलक्ष पठानिया बताते हैं कि मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बागवानी विभाग की विभिन्न योजनाएं, किसानों-बागवानों को लाभ मिल रहा है। बागवानी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से हिमाचल विकास योजना तथा एमआईटी-एच योजना के माध्यम से किसानों-बागवानों को मशरूम उत्पादन के लिए इकाइयां स्थापित करने हेतु सहायता प्रदान की जा रही है।

हिमाचल प्रदेश का वातावरण मशरूम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। सामान्य परिस्थितियों में यहां सितंबर से अप्रैल तक मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। विभाग द्वारा स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित करने के लिए प्रति इकाई एक लाख रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके अलावा बड़े स्तर पर उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए भी विभागीय योजनाओं के तहत सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

जिला कांगड़ा में इन योजनाओं के माध्यम से अब तक लगभग 211 बागवान लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें लगभग 164 स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित हो चुकी हैं, जबकि लगभग 42 उत्पादन इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त जिले में मशरूम उत्पादन के लिए तीन कंपोस्ट यूनिट भी स्थापित की गई हैं।

सामान्य परिस्थितियों में मशरूम उत्पादन केवल लगभग छह महीने तक ही किया जा सकता है, लेकिन अब जिले में कंट्रोल्ड एटमाॅस्फियर तकनीक पर आधारित आधुनिक मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इन इकाइयों में तापमान और वातावरण को नियंत्रित करके पूरे वर्ष मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है।

आॅफ सीजन में मशरूम की बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण बागवानों को इससे अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से पूरे वर्ष रोजगार उपलब्ध हो रहा है। यह इकाई स्वरोजगार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी बेहतर माध्यम बन रही है।

मशरूम की खेती कम भूमि और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू की जा सकती है। विभाग के अनुसार, 10-10 फीट के कमरे में छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने में लगभग 9 से 10 हजार रुपये की लागत आती है और उचित प्रबंधन के साथ ढाई से तीन महीने में लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में सीमित संसाधनों वाले युवाओं और बागवानों के लिए मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का एक अच्छा विकल्प बन सकता है।

अलक्ष पठानिया बताते हैं कि बागवानी विभाग द्वारा मशरूम उत्पादन के इच्छुक किसानों-बागवानों को प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है जिसके आधार पर बागवान अपनी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के बाद विभाग की योजनाओं के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। मशरूम उत्पादन न केवल किसानों-बागवानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पूरे वर्ष रोजगार के अवसर सृजित करने की भी क्षमता रखता है।

उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि जिले में बागवानी विभाग के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को दी जा रही सहायता के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण नगरोटा बगवां के सबलोटी गांव के किसान प्रणव धर हैं।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत रहे प्रणव धर को मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में स्वरोजगार की प्रेरणा मिली। उन्होंने बागवानी विभाग की योजना का लाभ लेते हुए मशरूम यूनिट स्थापित की। विभाग की ओर से उन्हें करीब 25 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की गई।

आज उनकी यूनिट में सालाना करीब 80 लाख रुपये का मशरूम उत्पादन हो रहा है और इससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 15 से 20 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर युवा कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकते हैं।

जिले में लगभग 211 ऐसे किसान हैं, जिन्होंने स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित कर विभाग की सब्सिडी का लाभ लिया है और सफलतापूर्वक मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने जिले के युवाओं से अपील की कि वे भी आगे आएं और मशरूम उत्पादन जैसी स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाएं। इससे न केवल परिवार की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी और देश की आर्थिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

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