खेलों में है रुचि लेकिन खिलाड़ी बनने का सपना अधूरा? ये करियर विकल्प आएंगे काम

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हर इनसान के मन में एक खिलाड़ी छिपा होता है। कुछ लोग अपने अंदर के खिलाड़ी को मैदान में उतारते हैं, तो कुछ इसे दबा देते हैं। अगर आपको खेलों में रुचि है, लेकिन आपका खिलाड़ी बनने का सपना पूरा नहीं हो पाया है, तो खेल प्रबंधन 12वीं के बाद बेहतर करियर विकल्प साबित हो सकता है। यह फील्ड आपको हमेशा खेलों से जोड़े रखेगी…

शाहपुर – नितिश पठानियां

हाल ही में स्पोट्र्स इंडस्ट्री में तेजी से विकास हुआ है। पहले जहां क्रिकेट पर पूरा ध्यान दिया जाता था, वहीं अब क्रिकेट छोड़ तमाम खेलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। किसी भी खेल में स्पोट्र्स मैनेजमेंट की काफी अहम भूमिका होती है, जिसे मार्केटिंग और बिजनेस की नजरों से भी देखा जा सकता है।

एक खेल का कैसे, कहां और कब आयोजन होना है इसकी सारी जिम्मेदारी स्पोट्र्स मैनेजमेंट के हाथों में होती है। स्पोट्र्स मैनेजमेंट में अपने कदम जमाने के लिए प्लांनिग, ऑर्गेनाइजिंग, डायरेक्टिंग, कंट्रोलिंग और लीडरशिप का होना बेहद जरूरी है।

खेल प्रबंधक का काम :

खेल प्रबंधक, खेलों और खिलाडिय़ों से संबंधित चीजों को देखते हैं। खेल प्रबंधक किसी भी टीम या खिलाड़ी के साथ जुडक़र मानव संसाधन गतिविधियों का प्रबंधन करने, मीडिया और खेल संगठनों से संपर्क बनाने का काम करते हैं। इसके अलावा खेल प्रबंधक खेलों के लिए मार्केटिंग, फंड जोडऩा, खेल से जुड़ी योजना बनाना, प्रोमोशन करना, बजट की निगरानी का काम भी देखते हैं।

इसके अलावा इनका काम स्पोर्ट मैनेजमेंट में एथिक्स, खेल के कानूनी पहलु, स्पोर्ट मैनेजमेंट की समस्याओं का पता लगाना और उनको हल करना होता है। ग्राहकों और खेल के व्यवहार को देखकर किसी खेल के प्रसारण को कैसे डिवेलप किया जाए, यह सब चीजें भी सिखाई जाती हैं। लॉ, फाइनांस और इकनॉमिक्स के साथ स्पोट्र्स मैनेजमेंट अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। फिजिकल एजुकेशन में डिग्री करने वाले युवा खेल प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करते हैं।

कोर्स

खेल प्रबंधक बनने के लिए आपको 12वीं के बाद खेल प्रबंधन में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना होगा। ग्रेजुएट लेवल पर बैचलर ऑफ स्पोट्र्स मैनेजमेंट, बीएससी इन फिजिकल एजुकेशन, बीएससी ऑनर इन स्पोर्ट साइंस, बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन इन स्पोर्ट मैनेजमेंट जैसे कोर्स हैं। इसमें खेल प्रबंधन, खेल प्रशिक्षण, खेल कानून की पढ़ाई करवाई जाती है। ग्रेजुएशन में खेल प्रबंधन और प्रशिक्षण, कानून आदि पढ़ाए जाते हैं।

ग्रेजुएशन के बाद खेल प्रबंधन में एमबीए और पीएचडी भी कर सकते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स करने के लिए ग्रेजुएशन होना अनिवार्य है। वैसे तो किसी भी स्ट्रीम के कैंडीडेट्स स्पोट्र्स मैनेजमेंट में कोर्स कर सकते हैं, लेकिन फिजिकल एजुकेशन (पीई) में ग्रेजुएशन हों तो ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।

आप अपनी पसंद के किसी खास स्पोट्र्स में बैचलर्स इन फिजिकल एजुकेशन (बी पीईडी) कर सकते हैं या अन्य संबंधित कोर्स कर सकते हैं। स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया फिजिकल एजुकेशन में कोर्स कराती है। आप वहां से अपनी पसंद के कोर्स कर सकते हैं।

यहां कर सकते हैं नौकरी

खेल इंडस्ट्री का दुनियाभर में बहुत बड़ा क्षेत्र है, इस क्षेत्र में नौकरी की असीम संभावनाएं हैं। भारत के साथ विदेशों में भी खेल प्रबंधकों की मांग बढ़ रही है। कोर्स करने के बाद आप प्रशिक्षक, खेल प्रबंधक, खेल जर्नलिस्ट, खेल फिटनेस एक्सपर्ट, खेल ऑर्गेनाइजर जैसे पदों पर देश और विदेश की बड़ी खेल अकादमी के साथ काम कर सकते हैं। फ्रीलांस काम भी कर सकते हैं। इस कोर्स के बाद सरकारी संस्थानों में भी नौकरी के विकल्प रहते हैं।

– आईपीएल और अन्य घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खेल लीग

– खेल मंत्रालय और सरकारी विभाग जैसे स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया।

– निजी खेल अकादमियां और फ्रेंचाइजी टीमें

– स्पोट्र्सवियर और उपकरण बनाने वाली कंपनियां जैसे प्यूमा, नाइकी आदि।

– खेल मीडिया और प्रसारण कंपनियां

शानदार सैलरी पैकेज

एक फील्ड में आकर्षक वेतन मिलता है। खेल प्रबंधक, खेल प्रशिक्षक, खेल आयोजक सबकी कमाई अलग-अलग होती है। एक खेल प्रबंधक को शुरुआती तौर पर 30,000 से 50,000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिल सकता है, वहीं खेल प्रशिक्षकों को 60,000 से 80,000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिल सकता है। अगर आप बड़ी खेल अकादमी या कंपनी से जुड़े हैं तो वेतन और भी ज्यादा हो सकता है। अनुभव बढऩे के साथ वेतन बढ़ता है। फ्रीलांस काम से भी अच्छी कमाई
होती है।

खेलों के प्रति जुनून बहुत जरूरी

स्पोट्र्स मैनेजमेंट के करियर में आने से पहले खेलों के प्रति आपका जुनून होना बहुत जरूरी है। आपको उस खेल के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए, जिसके लिए आप काम करना चाहते हैं। आपको यह समझना होगा कि खेल एक व्यवसाय की तरह कैसे काम करता है। आपका लक्ष्य मैदान पर जीत हासिल करना हो सकता है या स्टेडियम में दर्शकों की भीड़ जुटाना हो सकता है। आपका लक्ष्य सफलता होनी चाहिए। यहां हम स्पोट्र्स मैनेजमेंट यानी खेल प्रबंधन के लिए ऐसे ही जरूरी गुणों के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बहुत जरूरी हैं…

डिग्री पाना महज शुरुआत

खेल प्रबंधन में डिग्री हासिल करना खेल जगत में शानदार करियर की शुरुआत हो सकती है। इस रोमांचक सफर पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। खेल प्रबंधन की डिग्री लेने से पहले कुछ खास बातों पर गौर करना जरूरी है। इन बातों को समझकर आप सही फैसला ले पाएंगे और इस क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता दिखा पाएंगे।

क्षेत्र की समझ

खेल प्रबंधन का मतलब सिर्फ खेल के नियमों को समझना नहीं है, बल्कि खेल के पीछे के व्यवसाय को समझना भी है। इसमें टीमों और आयोजनों का प्रबंधन करना, सुविधाओं की देखरेख करना और मार्केटिंग रणनीतियों को लागू करना शामिल हो सकता है। इसके लिए आपको कई तरह के कौशल की जरूरत होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि खेल प्रबंधन की आपकी समझ आपकी रूचि और खूबियों से मेल खाती हो।

कम्युनिकेशन स्किल्स

खेल प्रबंधन के हर करियर में आपको उत्कृष्ट लिखित और मौखिक संचार कौशल यानी कम्युनिकेशन स्किल्स की आवश्यकता होती है। आपको रोजाना कोच, एथलीट, स्टेडियम कर्मचारियों, संगठन कर्मियों, मीडिया, एजेंटों, वकीलों, खेल प्रबंधकों के साथ बातचीत करनी पड़ सकती है और इसके लिए आपको दूसरों को निर्णयों के लिए राजी करना पड़ सकता है, इसलिए आपको अपने कम्युनिकेशन कौशल में विश्वास होना चाहिए।

खेल उद्योग का ज्ञान

स्पोट्र्स मैनेजमेंट में डिग्री लेने से पहले खेल उद्योग की अच्छी समझ होना जरूरी है। खेल प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पेशेवर खेल टीमें, खेल विपणन, कार्यक्रम प्रबंधन और खेल सुविधाओं से खुद को परिचित कराएं। उद्योग के रुझानों, चुनौतियों और अवसरों पर शोध करें, ताकि इस क्षेत्र का समग्र दृष्टिकोण मिल सके और उन क्षेत्रों की पहचान हो सके जो आपकी रुचि और लक्ष्यों के अनुकूल हों।

नेटवर्किंग और इंडस्ट्री में संपर्क

खेल प्रबंधन में सफल करियर के लिए एक मजबूत नेटवर्क बनाना और उद्योग से जुडऩा बहुत महत्त्वपूर्ण है, पेशेवरों के साथ नेटवर्क बनाने के अवसरों की तलाश करें, उद्योग के कार्यक्रमों में भाग लें, खेल संगठनों में शामिल हों और इंटर्नशिप का भी हिस्सा बनें। ये अनुभव न केवल क्षेत्र के ज्ञान और समझ को बढ़ाते हैं, बल्कि संभावित नौकरी के अवसरों और सलाह के लिए भी दरवाजे खोलते हैं। पेशेवरों और साथी छात्रों के साथ संबंध विकसित करना खेल उद्योग में आपके करियर की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

शैक्षणिक रास्ता

खेल प्रबंधन शिक्षा में बहुत अंतर हो सकता है। कुछ लोग बैचलर डिग्री का विकल्प चुन सकते हैं, जबकि अन्य मास्टर या यहां तक कि पीएचडी के साथ आगे विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इस बात पर विचार करें कि आप किस स्तर की शिक्षा हासिल करना चाहते हैं और इसमें लगने वाले समय और वित्तीय निवेश पर भी गौर करें।

सिखाने की विशेषज्ञता

फैकल्टी एक्सपर्टीज का अनुभव और विशेषज्ञता आपके सीखने की प्रक्रिया को बहुत बेहतर कर सकते हैं। उन कार्यक्रमों की तलाश करें जहां प्रशिक्षकों के पास प्रासंगिक बैकग्राउंड हो, जो क्षेत्र में सलाह दे सकें। खेल प्रबंधन कार्यक्रमों में ग्रेजुएट के लिए करियर के रास्तों पर शोध करें और करियर की भूमिकाओं के लिए प्रयास करें जो आपकी डिग्री के अनुरूप हों।

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