
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
डाॅ. वाईएस परमार मेडिकल काॅलेज से कालाअंब मार्ग पर स्थित मोगीनंद की दूरी करीब 8 से 10 किलोमीटर की है। मगर प्रवासी 25 वर्षीय महिला सुनीता पत्नी सरोज की प्रसव पीड़ा इतनी भयंकर हो चुकी थी कि उसकी अपनी जान तो खतरे में आ ही गई थी, साथ ही गर्भ में दो शिशुओं के जीवन को भी खतरा पैदा हो गया था
इतना भी वक्त नहीं था कि एंबूलेंस का इंतजार किया जाए या निजी वाहन में सुनीता को मेडिकल काॅलेज पहुंचाया जाए। मोगीनंद के वार्ड नंबर 1 की आशा वर्कर सुमित्रा के हौंसले की दाद देनी पड़ेगी कि उसने विकट परिस्थिति के बावजूद साहस दिखाकर प्रसूति करवाने का निर्णय लिया।
इसी बीच 108 को भी सूचित कर दिया गया था। सलानी पुल के नजदीक किराए के मकान में रहने वाली सुनीता की गोद में सुबह 8ः30 बजे पहले बेटे की किलकारी गूंजी। मात्र 10 मिनट के अंतर में दूसरे बेटे ने भी दुनिया में अपनी आंखे खोल कर मां की गोद में मातृत्व का अहसास लिया।
बता दें कि महिला के पहले भी दो बेटे हैं। 8 बजे जन्मे बेटे का वजन 2 किलोग्राम है, जबकि दूसरे का वजन 1 किलो 800 ग्राम है। प्रसूति के दौरान ही 108 भी मौके पर पहुंच चुकी थी। फौरन ही महिला को नवजात शिशुओं सहित मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। तीनों की हालत स्थिर है।
मौके पर पहुंचे 108 कर्मियों ने भी अनुकरणीय सेवाएं प्रदान की। उधर, आशा वर्कर का कहना था कि सुबह डिलीवरी को लेकर सूचना आई तो वो तुरंत मौके पर पहुंची। मौके पर पहुंचकर पाया कि फर्स्ट बेबी की डिलीवरी करीब-करीब होने को ही थी। ऐसे में उनके सामने घर में मौजूद सामान के अलावा डिलीवरी करवाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
खैर, अब तक तो ये सामने आता था कि 108 में डिलीवरी करवाई गई है, लेकिन आपातकालीन स्थिति में आशा वर्कर ने भी ये साबित कर दिया है कि वो भी कम नहीं है।
गौरतलब है कि नाहन मेडिकल कॉलेज के गायनी वार्ड पर भी अच्छा-खासा दबाव है। कुल मिलाकर आशा वर्कर सुमित्रा ने आपातकालीन स्थिति में बगैर घबराहट व संयम खोए बगैर ही जुड़वां बेटों की सफलता पूर्वक प्रसूति करवा दी।
