
शिमला – जसपाल ठाकुर
लोक निर्माण विभाग में 5000 कर्मचारियों के लिए भर्ती पॉलिसी तैयार है। पॉलिसी के तहत भर्ती होने वाले कर्मचारी कभी पक्के नहीं हो पाएंगे। हालांकि सरकार के पास जरूर यह अधिकार सुरक्षित रहेगा कि वह भविष्य में बदलाव लाकर नए नियम पॉलिसी जोड़ ले।
फिलहाल जो पॉलिसी लोक निर्माण विभाग ने बनाई है, उसमें भर्ती होने वाले कर्मचारी ताउम्र अनियमित रूप से सेवाएं देंगे। विभाग में भर्ती होने वाले सभी कर्मचारी भविष्य में स्थायी नौकरी की न तो मांग कर पाएंगे और न ही नौकरी के लिए आंदोलन छेड़ पाएंगे।
सभी कर्मचारियों को 4500 रुपए मासिक तय मानदेय पर नौकरी मिलेगी। भर्ती होने वाले कर्मचारी को पूरे आठ घंटे काम करना होगा। यदि उसका कार्य संतोषजनक नहीं पाया जाता है या कोई शिकायत आती है तो यह अधिकार लोक निर्माण विभाग के पास रहेगा कि वह कर्मचारी को नौकरी से हटा सके। कर्मचारियों का मुख्य कार्य सड़क के रखरखाव का होगा, लेकिन इनकी भर्ती बतौर मल्टीटास्क कर्मचारी के रूप में की जाएगी।
विभाग मंडल और उपमंडल स्तर पर सीधे साक्षात्कार से भर्ती करेगा। पॉलिसी में केवल बेरोजगारों को ही पीडब्ल्यूडी में भर्ती करने का फैसला किया गया है। इसमें अन्य दस्तावेजों के साथ ही बेरोजगारी का प्रमाणपत्र भी आवेदकों को लगाना होगा।
आवेदक के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं निर्धारित की गई है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में इससे अधिक शिक्षित होने वाले आवेदकों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। भर्ती के लिए साक्षात्कार मंडल और उपमंडल स्तर पर होंगे। विभाग ने आयु सीमा 18 से 45 साल तय की है। भर्ती के लिए आवश्यक दस्तावेजों में हिमाचली प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है।
पुलिस-सेना की तर्ज पर होगी शारीरिक जांच
लोक निर्माण विभाग में पांच हजार कर्मचारियों की भर्ती पुलिस और सेना की तर्ज पर होगी। इन भर्तियों की तरह ही लोनिवि भी आवेदकों की शारीरिक जांच करेगा। दरअसल, लोक निर्माण विभाग में भर्तियां सड़क किनारे काम करने वाले मजदूरों की हो रही हैं, ऐसे में उनका शारीरिक रूप से सक्षम होना अनिवार्य है।
विभाग ने पॉलिसी में तय कर दिया है कि केवल उन्हीं आवेदकों को अवसर मिलेगा, जो शारीरिक दक्षता परीक्षा को पास कर पाएंगे। ऐसे में भर्ती के दौरान शारीरिक जांच भी की जाएगी।
