फतेहपुर के रेहतपुर-रे-रियाली में खनन माफिया बेखौफ, दिन-रात खनन जारी

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फतेहपुर- व्यूरो रिपोर्ट

खनन पर रोक की बातों के बावजूद कांगड़ा जिले के फतेहपुर के सीमांत क्षेत्र में खनन नहीं रुक रहा, जो कि क्षेत्र की जनता के एक चिंताजनक विषय है। नए-नए फरमान और कुछ दिन चालान। स्थिति फिर वैसी की वैसी। आखिर माजरा क्या है।

आम लोगों की मानें, तो खनन माफिया इतना हावी हो चुका है कि इसको रोक पाना असंभव है। लोगों का मानना है कि जब भी सख्ती होती है तो कमजोर और रोजी-रोटी चलाने वाले कुछ लोगों पर होती है। उनका मानना है कि भले ही अवैध खनन को रोकने के लिए कई विभागों के पास शक्तियां दे रखी हैं , लेकिन बुरा कौन बनें।

पेयजल स्रोत सूखने पर

सीमांत क्षेत्र मंच के लोगों का कहना है कि अगर क्रशर मालिक इस तरह से अवैध खनन को अंजाम देते रहेंगे, तो जल स्रोत शीघ्र ही सूखने की कगार पर आ सकते हैं और सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है गहरे गड्ढे होने से बदल सकता है दरिया का रुख बदल सकता है, जिसका क्षेत्र के किसानों को काफी नुकसान हो सकता है।

इस मामले में बड़े मगरमच्छों को अब तक न पकड़ा पाना सरकारी दावों की काली दाल की ओर इशारा कर रहा है। चौकी प्रभारी रे भजन जरियाल का कहना है कि रे पुलिस लगातार अवैध खनन करने वालो का शिकंजा कस रही है और यह मुहिम पुलिस की आगे भी जारी रहेगी।

क्या कहते है उद्योग मंत्री

इस बारे जब उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर से बात हुई तो उनका कहना था कि अवैध खनन किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अवैध खनन करने वालों को किसी भी सूरत से नहीं बख्शा जाएगा। जल्द ही विभाग से जबाब-तलबी की जाएगी।

अंदर की बात यह भी है

चालान के बाद भी खनन नहीं रुक रहा, जब इस बारे पड़ताल की गई तो खनन माफिया का एक जबरदस्त पालन सामने आया। यह लोग रात के समय गतिविधियां शुरू करते हैं। इसके पीछे वजह रात को कोई अधिकारी कार्रवाई के लिए नहीं आता।

दूसरा की यह लोग मिलकर कार्य करते हैं। जैसे अगर पकड़े भी गए तो एक को पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि मिलकर भर देते हैं। अगर दस ट्रैक्टर खनन में लगे हो तो एक के पकड़े जाने पर उसका जुर्माना मिलकर भर देते हैं।

यही नहीं, उन्होंने अपने रूट पर जगह-जगह अपने आदमी खड़े किए होते हैं, जो जरा सी प्रशासनिक गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारी के पहुंचने से पहले खनन स्थल पर फोन के माध्यम से पहुंचा देते है।

चालान का इस पर कोई असर नहीं है। तभी चालान के बाद भी खनन नहीं रुक रहा। कुछ पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी खनन न रुक पाने की वजह है।

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