
हमें पुरानी पेंशन नहीं तो मंत्रियों को क्यों!
शाहपुर-नितिश पठानियां
एक देश, एक संविधान व एक कानून का संदेश देने वाली भारतीय जनता पार्टी पेंशन के मुद्दे पर क्यों अलग-अलग नीति अपनाए हुए है। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के कांगड़ा जिला प्रधान राजिंद्र मन्हास ने प्रश्न किया है कि 2003 के बाद निर्वाचित सांसदों और विधायकों को पेंशन क्यों प्रदान की जा रही है।
एक दिन सांसद, विधायक रहने पर भी उनको पेंशन मिलती है, तो कर्मचारियों को पेंशन देने में हिचक क्यों। सरकारी कर्मचारियों को भी पुरानी योजना की तरह पेंशन मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन प्रदान नहीं की जाती है, तो राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, सांसदों और विधायकों की भी पेंशन बंद की जानी चाहिए।
जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष पराशर, महासचिव अनीश धीमान, वित्त सचिव वीरेश भारती, मुख्य प्रेस सचिव विनोद कुमार, जिला मुख्य प्रवक्ता जोगिंद्र सिंह, उपाध्यक्ष डाक्टर विकास नंदा, राज्य महिला विंग मुख्य संगठन सचिव पूजा सबरवाल, राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ वैध, राज्य मुख्य प्रवक्ता अनिरुद्ध गुलेरिया, महिला विंग राज्य महासचिव ज्योतिका मेहरा, राज्य महिला विंग उपाध्यक्ष मोनिका राणा, राज्य मीडिया प्रभारी पंकज शर्मा, अतिरिक्त राज्य महासचिव अंकुर शर्मा, राज्य उपाध्यक्ष नारायण, अजय राणा के साथ राज्य सह मीडिया प्रभारी अलका गिल ने बताया कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य सरकारों व केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए नई पेंशन स्कीम लागू की है।
इस व्यवस्था को जनवरी 2004 के बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर नई पेंशन योजना लागू की गई है। अगर 2003 के बाद के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं, तो फिर 2003 के बाद के चुन के आए नेताओं को पेंशन देकर सरकार दोहरे मापदंड क्यों अपना रही है। संगठन ने इस अन्याय को आमजन तक पहुंचाने का मन बना लिया है और अब नेताओं की पेंशन पर भी जनता सवाल उठाएगी।
