15 साल से दूसरे के झोपड़े में रह रहा बीपीएल परिवार

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छह बेटियों और एक बेटे के पिता सोहन सिंह पत्नी के साथ पिछले 15 साल से दूसरे के घर में शरण लेकर रह रहे हैं। सोहन सिंह पुत्र हीरा सिंह को 2017 में पंचायत ने बीपीएल श्रेणी में दर्ज तो किया, लेकिन आवास के लाभ से कोसों दूर है।

व्यूरो रिपोर्ट

गुरबत भरा जीवन कैसा होता है, यह कोई सोहन सिंह से पूछे। बीपीएल योजना में शामिल होने पर भी खुद का आशियाना नहीं। बेटियों को पढ़ाने तक के पैसे नहीं। दो वक्त की रोटी का गुजारा भी दिहाड़ी से चल रहा है। कभी शिमला तो कभी पंचायत में किसी अन्य के घर कामकाज कर नौ सदस्यीय परिवार का पेट पाल रहा है। भले ही सरकार हर गरीब तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने के दावे कर ले, लेकिन सोहन सिंह को आज तक इस योजना का लाभ नहीं मिल सका।

छह बेटियों और एक बेटे के पिता सोहन सिंह पत्नी के साथ पिछले 15 साल से दूसरे के घर में शरण लेकर रह रहे हैं। रेणुका विधानसभा क्षेत्र की दुर्गम भाटगढ़ पंचायत के बांदल गांव के रहने वाले सोहन सिंह पुत्र हीरा सिंह को 2017 में पंचायत ने बीपीएल श्रेणी में दर्ज तो किया, लेकिन आवास के लाभ से कोसों दूर है। डेढ़ दशक पहले सोहन सिंह को गांव के पृथ्वी सिंह ने अपने घर में शरण दी। वह किसी और गांव में रह रहे हैं।

अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले सोहन सिंह ने 2 जून, 2017 को आवास उपलब्ध कराने के कागजात संगड़ाह स्थित कल्याण विभाग को उपलब्ध कराए। आजतक आवास योजना उन तक नहीं पहुंची। बिजली का मीटर जरूर मिला, लेकिन इसे पृथ्वी सिंह के घर पर लगाया गया है। इसको लेकर सोहन सिंह जामूकोटी में गत दिन हुए जनमंच में भी पहुंचे। यहां अपनी स्थिति का दुखड़ा ऊर्जा मंत्री को सुनाया। हालांकि, मंत्री ने इस विषय में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सोहन सिंह ने बताया कि वह अपनी गरीबी के चलते दो बड़ी बेटियों को आठवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ा सके।

चार बेटियां अभी छोटी क्लास में हैं। उन्होंने बताया कि उसका आवेदन आवास योजना के लिए गया है पर कुछ नहीं बन पाया। बीडीओ संगड़ाह हरमेश ठाकुर ने बताया कि मामले का पता लगाया जाएगा कि आवास योजना में किस नंबर पर है। मामला पुराना है। 2021-22 में सीएम आवास योजना के तहत विकास खंड की 44 पंचायतों में पांच आवास को मंजूरी मिली है। सोहन सिंह के केस का पता लगाया जाएगा।

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