
कांगड़ा, हिमखबर- टीम
कांगड़ा जिला के देहरा, फतेहपुर, सकरी, नगरोटा बगवां से पालतू पशुओं में मुहं खुर बीमारी फैल गई है जिससे लोग परेशान हो गए हैं। वहीं आवारा पशुओं की मौत भी हो रही है। पशुओं की मुंह-खुर की भयानक महामारी ने किसानों के पशुधन का बेहद नुकसान पहुंचाया है।
छोटी किसानी और मजदूर परिवारों के लोग अपने पशुधन का नुकसान सहने में असमर्थ हैं। कोरोना महामारी से बर्बाद हुए लोग अपने पशुओं का दूध बेचकर गुजारा कर रहे हैं। पशु धन के सहारे अपने परिवार पालने वाले लोग इस समय बर्बादी की कगार पर खड़े हैं।
कांगड़ा जिला में कुल 386 मामले सामने आए हैं। देहरा में 50, नगरोटा सूरियां के सकरी में 15, नगरोटा बगवां के मलां 21 व ज्वाली के घाड़ जरोट हरसर में 300 मामले पॉजिटिव आए हैं।
वहीं कांगड़ा जिला के पौंग झील के किनारे के क्षेत्र में पशुओं को खुर-मुंह की बीमारी होने से पशुपालकों में हड़कंप मच गया है। एक साथ कई पालतू पशु बीमार होकर मर रहे हैं। इलाके के पशु पालकों का मानना है कि पशुओं में यह बीमारी पौंग झील के खाली क्षेत्र में अपने मवेशियों के साथ आए पंजाब व जेएंडके के पशुओं के कारण फैली है।
क्योंकि गुज्जरों की भैंसों में खुर-मुंह की बीमारी है और इनकी कई भैंसें इस बीमारी से मर गई हैं। लेकिन सरकार व प्रशासन ने मात्र आश्वासन देकर ग्रामीणों से इतिश्री कर ली। नतीजा यह हुआ कि अब आसपास के गांवों के पशु भी इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं।
ज्वाली के हरसर में 300 पॉजिटिव मामले, कांगड़ा जिला में कुल 386 मामले आए सामने
कांगड़ा जिला में मुहं खुर से पॉजिटिव आए मामलों में अभी तक चोंकाने वाले मामले सामने आए हैं। कुल 386 पशुओं में पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। जिनमें कांगड़ा जिला के देहरा में 50, नगरोटा सूरियां के सकरी में 15, नगरोटा बगवां के मलां 21 व ज्वाली के घाड़ जरोट हरसर में 300 मामले पॉजिटिव आए हैं।
देहरा की ख़बली पंचायत के पूर्व उप-प्रधान सुभाष ने बताया कि उन्होंने व यहां के लोगों ने पशुओं में तेजी से फैल रही खतरनाक बीमारी मुहं खुर से बचाने के लिए अपने मवेशियों को चराने के लिए पौंग डैम के किनारे व घासनियों में छोड़ना बंद कर दिया है।
सुभाष ने कहा कि वह पिछले महीने से अपने पशुओं को पशुशाला में ही बांधकर रख रहे हैं ताकि उनके पशुओं में मुहं खुर की बीमारी का संक्रमण ना फैले।
उपमंडलीय पशु चिकित्सालय देहरा में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश कुमार ने भी माना है कि पशुओं के खुर मुंह की बीमारी एक पशु से दूसरे पशु के संपर्क में आने से फैलती है। उन्होंने खासकर पौंग झील के किनारे बसे लोगों को पशुओं को घर पर बांधने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में 386 पॉजिटिव मामले आए है। ज्यादातर मामले पौंग झील से सटे क्षेत्रों के ही हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब व जम्मू और कश्मीर के गुज्जर अपने मवेशियों को लेकर पौंग झील के किनारे आते हैं।
उनके मवेशियों में मुंह खुर की बीमारी होती है और उस बजह से यह बीमारी हमारे स्थानीय पशुओं में भी फैल जाती है। पशुओं को मुंह खुर की बीमारी के संक्रमण से बचाने के लिए पौंग झील के क्षेत्र में खुले में न छोड़ने का आग्रह किया है।
क्या होता है मुंह-खुर रोग
मुंह-खुर रोग विषाणु से होता है और अत्यधिक संक्रामक है। एक पशु से दूसरे में छूने से फैलती है। इससे दूध देने वाले पशु दूध देना कम कर देते हैं हालांकि बीमारी से उनकी मौत नहीं होती है। यह बीमारी दूध देने वाले पशुओं विशेष तौर पर गायों, भैंस, भेड़, बकरी में आम तौर पर होता है।
