
कोटला, स्वयंम
हिमाचल प्रदेश में जब से कोरोना महामारी ने दस्तक दी है । तभी से कोरोना रोकथाम के लिए सभी प्रशासनिक तंत्र के साथ हैल्थ विभाग के नियमित रूप से कार्यरत कर्मचारियों की ड्यूटी कार्य अवधि में लगाई गई है। यह बात ग्राम पंचायत डोल भटहेड के पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उप प्रधान साधु राम राणा ने कही ।
उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को छोड़कर लगभग सभी कर्मचारी अपनी ड्यूटी निर्धारित समय में करते हैं लेकिन कोरोना बचाव में देखा गया है कि हैल्थ विभाग के अधीनस्थ कार्यरत आशा वर्करों की ड्यूटी का कोई समय तय नहीं है । कोरोना बचाव में उतरी समस्त आशा वर्करों को अपने – अपने क्षेत्रों में जान जोखिम में डालकर रात-दिन लोगों के घरों में कोरोना संबंधी जानकारी लेने कोरोना प्रभावित मरीजों के साथ हर दिन संपर्क करने एवं बाहर से आने वाले लोगों की जानकारी लेने हेतु पैदल ही चलना पड़ता है ।
जबकि और तो और छुट्टी वाले दिन भी आशा वर्करों को भी नियमित रूप से कार्यरत रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस जोखिम भरे काम के बदले सरकार की ओर से आशा वर्करों को मिलने वाली वेतन राशि नाम मात्र ही है। आशा वर्करों से सरकार कम वेतन में अधिक काम लेने के बावजूद भी इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं कर पा रही है ।
जबकि आशा वर्करों की ड्यूटी की जवाबदेही को देखते हुए सरकार से आशा वर्करों के वेतनमान को बढ़ाने एवं इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग की जाती है। ताकि आशा वर्कर अपने आप को एवं अपने परिवार को सुरक्षित समझकर अपनी ड्यूटी निभाने का जोखिम उठा सकें।
