हिमख़बर डेस्क
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हिमकेयर योजना के तहत इलाज के खर्च का भुगतान न करने पर कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत के कड़े आदेश के बाद मंगलवार को सरकार के विशेष सचिव (स्वास्थ्य) डॉ. अश्वनी शर्मा व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार जो भी राशि देय बनती है, उसे आगामी दो दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा।
न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकार के लिखित आश्वासन और विशेष सचिव के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को आगामी गुरुवार तक के लिए टाल दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सरकार योजना के तहत प्रतिबद्ध है और खुद विभाग ने भी मरीज के दावे को सही मान लिया है, तो केवल फंड उपलब्ध न होने के आधार पर इसे रोका नहीं जा सकता।
याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार राज्य सरकार की हिमकेयर योजना के लाभार्थी हैं। उनको दिल की बीमारी के चलते पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती होना पड़ा था। वहां उनके दिल में कोरोनरी स्टंट डाले गए थे।
इस इलाज के दौरान उनका खर्च 2,70,604 रुपये आया। हिमकेयर कार्ड धारक होने के नाते याचिकाकर्ता को पूरी तरह मुफ्त इलाज मिलना चाहिए था।
लेकिन राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत अस्पताल को समय पर भुगतान न करने के कारण पीड़ित को यह भारी-भरकम राशि मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में बेहद मुश्किल से अपनी जेब से भुगतनी पड़ी।
जब याचिकाकर्ता ने बार-बार गुहार लगाने के बाद थक-हारकर 12 दिसंबर 2025 को एच.पी. स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा, तो विभाग ने 2 फरवरी 2026 को अपने जवाब में यह स्वीकार किया कि मरीज की 2.70 लाख की यह क्लेम राशि पूरी तरह वैध है।

