‘मेड इन हिमाचल’ का जलवा – सुलाह की लीची का दुनिया में डंका, अमरीका-कनाडा और ऑकलैंड तक सप्लाई

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हिमखबर डेस्क

प्रदेश भर में ‘लीची का गढ़’ के नाम से प्रसिद्ध सुलाह क्षेत्र ने इस बार भी धाक जमाई है। इस बार फिर अपनी मिठास से नाम सुलाह का नाम रोशन किया है। दूर-दूर तक अपनी पहचान बना चुकी सुलाह की लीची इस सीजन में प्रदेश के साथ-साथ बाहरी राज्यों और विदेशों तक भेजी जा रही है।

ऐसे में बंपर पैदावार के चलते बागबानों व लीची व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं। गांवों में भी रोजगार की बहार भी लौटी है। बता दें कि लीची का सीजन आते ही सुलाह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को पंख लग जाते हैं। क्योंकि इस सीजन में बागबानों और व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों की जेबें भी हरी होती है।

पिछले साल ओलावृष्टि के कारण लीची की फसल बड़े पैमाने पर खराब हो गई थी। उस नुकसान से बागबानों और व्यापारियों दोनों को भारी घाटा उठाना पड़ा था। लेकिन इस बार प्रकृति मेहरबान रही। अच्छी फसल ने न सिर्फ बागबानों की मेहनत का फल दिया है, बल्कि पिछले साल के जख्मों पर मरहम का काम भी किया है।

लीची सीजन शुरू होते ही क्षेत्र के गांवों में रौनक बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को तुड़ाई, पैकिंग और ढुलाई में रोजगार मिल रहा है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य राज्यों से आए व्यापारी भी यहां डेरा जमाकर लीची खरीद रहे हैं और इसे बड़ी मंडियों तक भेजकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बागबानों का कहना है कि सुलाह की लीची का स्वाद और गुणवत्ता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यही वजह है कि इसकी डिमांड हर साल बढ़ती जा रही है।

कनाडा, ऑकलैंड, अमरीका तक मिठास

दिल्ली से आए हुए ठेकेदार दिलशान ने बताया कि पिछले साल से इस सीजन में लीची की बढिय़ा फसल तैयार हुई है। इस दौरान उन्होंने बताया कि सुलाह की लीची की बाहरी राज्यों कोलकाता, बिहार, हिसार आदि अन्य शहरों में बहुत डिमांड है।

साथ ही उनके द्वारा लिए हुए बगीचों में लगी लीची को ग्रेडिंग करके दिल्ली भेजा जाता है और दिल्ली से सुलाह की लीची को कनाडा, ऑकलैंड, अमरीका आदि अन्य विदेशी शहरों में भेजा जाता है। यह ही नहीं, इस व्यापार से हम खुद भी कमा रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।

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