श्री रेणुका जी मेला ग्राउंड में शादी समारोह में परोसी गई शराब, धार्मिक भावनाएं आहत…

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हिमखबर डेस्क

देवभूमि हिमाचल के पवित्र स्थल श्री रेणुका जी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के आक्रोश को भड़का दिया है। श्री रेणुका जी के मेला ग्राउंड में शादी समारोह की आड़ लेकर खुलेआम शराब परोसे जाने की चर्चा जोरों पर है। दरसअल,मेला ग्राउंड में शराब, बीयर की खाली बोतलें व गंदगी के ढेर से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया में सामने आये है।

यह स्थान भगवान श्री परशुराम की जन्मस्थली के चलते धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण व संवेदनशील है। वर्षों से इस अत्यंत पवित्र स्थान पर शराब और मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध है। हैरानी की बात यह है कि मेला ग्राउंड से कुछ ही दूरी पर परशुराम ताल स्थित है और समीप ही हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील श्री रेणुका जी मौजूद है।

बावजूद इसके, नियमों और परंपराओं को दरकिनार कर जिस तरह से यह कृत्य किया गया, उसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ यहां पहुंचते हैं और धार्मिक मर्यादाओं का सख्ती से पालन किया जाता है। इतना ही नहीं पवित्र झील के किनारे हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम का एक होटल भी संचालित है, जहां स्थानीय धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए न तो शराब परोसी जाती है और न ही मांसाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

जानकारी के मुताबिक हाल ही में मेला ग्राउंड में एक विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस स्थल के स्वामित्व को लेकर पहले श्री रेणुका जी विकास बोर्ड और वन्य प्राणी विभाग के बीच विवाद की स्थिति रही है, लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से इसका प्रबंधन वन विभाग के पास है। जानकारी यह भी सामने आई है कि वन विभाग इस स्थान को विवाह जैसे आयोजनों के लिए बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराता है।

घटना से संबंधित तस्वीरों और वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि समारोह के दौरान शराब का सेवन किया गया। इतना ही नहीं, आयोजन के बाद परिसर की ठीक से सफाई भी नहीं की गई, जिससे पवित्र स्थल की गरिमा और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

श्री रेणुका जी वन मंडल के डीएफओ बलदेव राज के बोल

उधर, श्री रेणुका जी वन मंडल के डीएफओ बलदेव राज ने पुष्टि करते हुए बताया कि शादी के लिए अनुमति दी गई थी और आयोजकों को साफ-सफाई के निर्देश भी दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि मेला ग्राउंड के उपयोग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि समारोह के दौरान शराब का सेवन किया गया, जबकि इस क्षेत्र में ऐसा करना वर्जित है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी पवित्र धार्मिक स्थल पर इस तरह की लापरवाही कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय होगी। प्रशासन को इस तरह के मामले में सख्त कार्रवाई  करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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