हिमखबर डेस्क
देहरादून-पांवटा साहिब-कालाअंब-चंडीगढ़ हाईवे पर बढ़ते सड़क हादसे अब गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अब भी मौन नजर आ रहे हैं। खासतौर पर कालाअंब स्थित वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, जहां रोजाना सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं, वहां सुरक्षा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं।
इस स्कूल में पढने वाले बच्चों की तादाद सिरमौर में शायद सबसे अधिक होगी, क्योंकि यहां औद्योगिक क्षेत्र के कामगारों के बच्चे बड़ी संख्या में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल की छुट्टी के समय जब बच्चे बाहर निकलते हैं, उसी दौरान हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही जारी रहती है।
हैरानी की बात यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में न तो स्पीड ब्रेकर है और न ही कोई अन्य ठोस सुरक्षा उपाय, जिससे हादसों का खतरा हर वक़्त बना रहता है। शनिवार को स्कूल से कुछ ही दूरी पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जहां माता-पिता की इकलौती बेटी की जान चली गई।
इस घटना के बाद से स्कूल के छात्र, उनके अभिभावक और शिक्षक गहरे डर और चिंता में हैं। वहीं, रविवार को भी इसी हाईवे पर कोलर के पास एक 17 वर्षीय किशोर की मौत ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
यह स्थिति सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और नाहन के विधायक सहित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि क्या इस वीडियो को देखने के बाद भी कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
यदि हाईवे के नियम स्पीड ब्रेकर की अनुमति नहीं देते, तो क्या वैकल्पिक उपाय भी नहीं किए जा सकते? कम से कम स्कूल के आसपास छुट्टी के समय बैरिकेडिंग, पुलिस की तैनाती या वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के उपाय तो किए ही जा सकते हैं।

शिक्षक वर्ग में भी गहरी चिंता….
उधर, स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षक वर्ग में भी गहरी चिंता व्याप्त है। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कालाअंब के शिक्षकों ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर कालाअंब थाना के एसएचओ को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के करीब 1200 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह 9 बजे और दोपहर 3 बजे की छुट्टी के दौरान स्कूल के ठीक सामने नेशनल हाईवे पर वाहनों का सैलाब उमड़ पड़ता है। भारी औद्योगिक वाहनों की तेज रफ्तार के कारण छोटे बच्चों का सड़क पार करना जानलेवा साबित हो रहा है।
शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्कूल गेट के दोनों ओर 100 मीटर की दूरी पर पक्के स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। ‘School Ahead’ के चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि वाहन चालक गति कम कर सकें। इसके अलावा, स्कूल के खुलने और छुट्टी के समय पुलिस बल की अनिवार्य तैनाती भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे बच्चों की सुरक्षित आवाजाही हो सके।
शिक्षकों ने यह भी बताया कि वे जल्द ही इस मुद्दे को उपायुक्त सिरमौर के समक्ष भी उठाएंगे। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन इस संवेदनशील विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ठोस और प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
दहशत बन चुका है यह हाईवे….
पांवटा साहिब से नाहन तक दोहरी सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ते टिपर और भारी वाहन हर दिन खतरे का संकेत दे रहे हैं। हरियाणा सीमा में प्रवेश करने से पहले ही यह हाईवे लोगों के लिए दहशत का कारण बन चुका है। स्टोन क्रशर से लेकर कालाअंब तक का करीब 65 किलोमीटर का सफर हजारों लोगों के लिए डर का पर्याय बन गया है।
अब समय आ गया है कि जिम्मेदार जागें और केवल कागजी योजनाओं के बजाय जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि मासूम जिंदगियों को यूं सड़कों पर खत्म होने से बचाया जा सके।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, नाहन के स्थानीय विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के लिए यह मामला सीधे तौर पर जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। देहरादून-पांवटा साहिब-कालाअंब-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित कालाअंब स्कूल के बाहर बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल अब अनदेखे नहीं किए जा सकते। रोजाना सैकड़ों छात्र इसी खतरनाक सड़क को पार करते हैं, लेकिन न तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं और न ही कोई ठोस पहल नजर आती है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधि सिर्फ घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देंगे, और कब पहले से कदम उठाकर इन हादसों को रोका जाएगा।

