रात होते ही आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर ताला, पर्याप्त स्टाफ न होने से लोगों को पेश आ रही दिक्कतें

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ज्वाली – अनिल छांगू

विधानसभा क्षेत्र ज्वाली के अधीन दस बिस्तरीय राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हरसर का दर्जा तो बढ़ाया गया लेकिन आजतक इसमें दर्जा के हिसाब से सुविधाओं का अभाव है। आयुर्वेदिक चिकित्सालय हरसर में दस बैड सहित अन्य सामान तो पहुंच गया लेकिन दर्जा के हिसाब से डाक्टरों व अन्य स्टाफ की आजतक नियुक्ति नहीं हो पाई है।

जिस कारण रात को आयुर्वेदिक चिकित्सालय बंद रहता है। इस चिकित्सालय पर ग्राम पंचायत हरसर, पनालथ व घाडज़रोट की जनता निर्भर करती है तथा उनको रात के समय में चिकित्सा सुविधा लेने के लिए सिविल अस्पताल ज्वाली या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगरोटा सूरियां में जाना पड़ता है।

वर्ष 1960 में आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी हरसर में खुली थी तथा इसका दर्जा वर्ष 2003 में इसका दर्जा बढ़ाकर अस्पताल किया गया व वर्ष 2012 में इसको अपना भवन नसीब हो पाया। कांग्रेस सरकार में इसका दर्जा बढ़ाया गया था लेकिन बिडंबना है कि आजतक दर्जा के हिसाब से स्टाफ मुहैया नहीं हो पाया है। आयुर्वेदिक अस्पताल हरसर में लैब भी नहीं है।

सूत्रों के अनुसार दर्जा के हिसाब से अस्पताल में तीन डाक्टर, दो स्टाफ नर्स, चौकीदार, लैब तकनीशियन, वार्ड ब्वॉय कम कुक के पद होने चाहिए परंतु अस्पताल में एक डाक्टर, एक नर्स व एक चौकीदार है। पूर्व में भाजपा की सरकार रही तो इस राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की सुध नहीं ली गई और अब जनता को कांग्रेस सरकार व मंत्री चंद्र कुमार से आस जगी है कि दर्जा के हिसाब से स्टाफ मुहैया होगा।

बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व मंत्री चंद्र कुमार से मांग की है कि दर्जा के हिसाब से स्टाफ मुहैया करवाया जाए ताकि रात्रि में चिकित्सा सुविधा के लिए मरीजों को भटकना न पड़े।

डाक्टर ऋतु चौधरी के बोल

इस बारे में उपमंडलीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी ज्वाली डा. ऋतु चौधरी ने कहा कि हमने उच्चाधिकारियों को बार इसके संबंध में लिखित रूप से अवगत करवाया है। उन्होंने कहा कि स्टाफ मुहैया करवाना सरकार व उच्चाधिकारियों का कार्य है।

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