हिमाचल किसान सभा के होतम सौंखला ने कहा कि प्रदेश का पुनर्निर्माण, पुनर्वास व पुर्नस्थापन केंद्र सरकार की मदद के बिना असंभव है। इसलिए प्रदेश में हुई त्रासदी को देखते हुए केंद्र राष्ट्रीय आपदा घोषित करे।
कुल्लू – अजय सूर्या
प्रदेश में भारी बरसात के चलते हुई तबाही से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने मोर्चा खोल दिया है।
इस दौरान सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। सरवरी से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली गई।
हिमाचल किसान सभा के होतम सौंखला ने कहा कि कहा कि इतनी भीषण त्रासदी के बावजूद केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं कर रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश में कुल भूभाग का करीब 67 प्रतिशत वन भूमि है।
मोदी सरकार जानबूझकर राजनीतिक द्वेष के लिए हिमाचल के लोगों की मदद नहीं कर रही है और इस भयंकर आपदा को जानबूझकर राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में आज हजारों परिवार बेघर हैं जिनके पुनर्वास के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। प्रदेश में सरकार के आकलन के अनुसार 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हजारों परिवारों के मकान बह गए हैं। 441 लोगों की जान गई है। किसान परिवारों की जमीनें भूस्खलन से खत्म हो गईं और फसलें भी तबाह हो गईं।
प्रदेश का पुनर्निर्माण, पुनर्वास व पुर्नस्थापन केंद्र सरकार की मदद के बिना असंभव है। इसलिए प्रदेश में हुई त्रासदी को देखते हुए केंद्र राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। प्रदेश को एक मुश्त 10 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक राहत पैकेज शीघ्र दिया जाए।