स्क्रब टायफस: IGMC में 5वीं मौत, 723 पॉजिटिव, हिमाचल में तेजी से फेल रहा स्क्रब टायफस

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शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टायफस कहर बनकर टूट रहा है। सूबे में अब इस बीमारी की वजह से पांचवीं मौत हुई है। शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में ये सभी पांच मौतें हुई हैं। प्रदेश में अब तक 5218 टेस्ट किए गए हैं, जिनमें 723 व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए।

शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में लगातार लोग इलाज के लिए पहुंच रह हैं। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को सोलन जिले के बुजुर्ग की मौत हुई है। पहले भी सोलन जिले से ही चार महिलाओं को इस बीमारी के चलते जान गंवानी पड़ी है।

दरअसल, हिमाचल में बरसात शुरू होते ही हर साल स्क्रब टायफस शुरू हो जाता है। आईजीएमसी में मेडिसन विभाग के एचओडी डॉक्टर प्रोफेसर बलवीर वर्मा ने बताया कि स्क्रब टायफस एक जीवाणु से संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाडिय़ों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है।

जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में फैलता है और स्क्रब टाइफस बुखार बन जाता है। स्क्रब टाइफस एक जीवाणु संक्रमण से होने वाली बीमारी है। विशिष्ट बैक्टीरिया रिकेट्सिया नामक समूह से संबंधित है। यह रोग पिस्सू, घुन, जूँ आदि जैसे छोटे कीड़ों के काटने से फैलता है। स्क्रब टाइफस के मामले में, संक्रमण छोटे लार्वा माइट्स के माध्यम से फैलता है।

डॉक्टर बलवीर वर्मा ने बताया कि लोगों को चाहिए कि इन दिनों झाडियों से दूर रहे और घास आदि के बीच न जाएं, लेकिन किसानों और बागवानों के लिए यह संभव नहीं है क्योंकि आगामी दिनों में खेतों और बगीचों में घास काटने का अधिक काम रहता है।

यही कारण है कि स्क्रब टायफस का शिकार होने वाले लोगों में किसान और बागवानों की संख्या ज्यादा रहती है। स्क्रब टायफस होने से शुरू में कोई दर्द नहीं होता है। घास में जाने पर यदि कीट काट ले तो कुछ समय बाद वहां काले निशान पड़ने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को तुरंत अस्पताल जाकर जांच करवानी चाहिए।

बुखार आए तो तुरंत जाएं अस्पताल

स्क्रब टायफस के लक्षणस्क्रब टायफस होने पर मरीज को तेज बुखार 104 डिग्री से 105 तक जा सकता है। जोड़ों में दर्द और कंपकपी ठंड के साथ बुखार शरीर में ऐंठन अकडऩ या शरीर का टूटना, अधिक संक्रमण में गर्दन, बाजू और कूल्हों के नीचे गिल्टियां का होना आदि इसके लक्षण हैं।

स्क्रब टायफस से बचने के उपाय

  • लोग सफाई का विशेष ध्यान रखें
  • घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
  • घर और आसपास कीटनाशक दवा का छिडक़ाव करें
  • मरीजों को डॉक्सीसाइक्लन और एजिथ्रोमाईसिन दवा दी जाती है
  • स्क्रब टायफस शुरूआत में आम बुखार की तरह होता है, लेकिन यह सीधे किडनी और लीवर पर अटैक करता है
  • यही कारण है कि मरीजों की मौत हो जाती है।

किस तरह की दवाएं दी जाती हैं?

स्क्रब टाइफस का इलाजस्क्रब टाइफस का उपचार एंटीबायोटिक दवाओं, विशेष रूप से डॉक्सीसाइक्लिन से होता है। यह किसी भी उम्र के रोगियों को दिया जा सकता है, जब तक कि अन्य चिकित्सीय स्थितियाँ इसके उपयोग को प्रतिबंधित न करें।

हालांकि, इसमें शामिल प्रक्रियाओं के कारण निदान की पुष्टि में समय लग सकता है। जितनी जल्दी एंटीबायोटिक्स ली जाएंगी, दवा उतनी ही अधिक प्रभावी होगी और रिकवरी भी उतनी ही तेजी से होगी।

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