प्रजापिता ब्रह्माकुमारिज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय रिवालसर ने मनाया रक्षा बंधन

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मंडी/रिवालसर – अजय सूर्या 

प्रजापित ब्रह्माकुमारिज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय रिवालसर ने मनाया पावन रक्षा बंधन। कार्यक्रम का शुभारंभ नायब तहसीलदार टेक चंद कश्यप ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।

कार्यक्रम में स्थानीय भाई बहनों के साथ साथ कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए कार्यक्रम में सभी भाई बहनों को बी० के० सुनीता दीदी जी ने रक्षा सूत्र में बाँधा, और साथ ही बी० के० सोमा बहन ने राखी के पावन त्यौहार के रहस्य का सभी भाई बहनों को बताया ।

“रक्षा बंधन का आध्यात्मिक महत्व तब होता है जब कोई व्यक्ति विचारों, शब्दों और कार्यों में पवित्रता का जीवन जीने के लिए उस सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा (भगवान) के साथ पवित्रता का दिव्य व्रत लेता है। हम में से प्रत्येक एक छोटी सी प्रकाश रूपी आध्यात्मिक ऊर्जा है जो प्रत्येक आत्मा को शुद्ध और हार्दिक शुभकामनाएँ देती है क्योंकि राखी प्यार, पवित्रता के अहसास और परिवर्तन का उत्सव है।

रक्षाबंधन से स्वर्ग का स्वराज्य प्राप्त हो अथवा मनुष्य यम के दंडों से बच जाए, पवित्रता का ही बंधन हो सकता है, अन्य कोई बंधन नहीं। अब प्रश्न उठता है कि इस त्योहार से इतनी बड़ी प्राप्ति कैसे होती है? इसका उत्तर हमें इस त्योहार के अन्यान्य नामों से ही मिल जाता है।

सचमुच भारत-भूमि की मर्यादायें और यहाँ की रस्में एक बहुत ही गहरे दर्शन को स्वयं में छिपाये हुए है। यह स्वयं में एक जागृति का प्रतीक है और एक महान संस्कृति का द्योतक है रक्षा बंधन को ‘विष तोड़क पर्व’ ‘पुण्य प्रदायक’ पर्व भी कहा जाता है, जो इसके अन्य- अन्य नाम हैं। उससे यह सिद्ध होता है कि यह त्योहार रक्षा करने, पुण्य करने और विषय-विकारों की आदत को तोड़ने की प्रेरणा देने वाला त्योहार है।

दूसरे शब्दों में कहें, अर्थ-बोध के बिना राखी मनाने की बजाय अब राखी के मर्म को समझकर इसे मानते हुए, वातावरण को बदलने की आवश्यकता है। तभी इसकी सार्थकता सिद्ध होगी।

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