शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल में गेहूं की कटाई और थ्रेशिंग का काम जोरों पर है। इसी बीच बुधवार सुबह हुई बारिश ने सारा खेल बिगाड़ दिया। बेमौसमी बारिश से जहां खेतों में काटी गई गेहूं की फसल बुरी तरह भीग गई।
वहीं जिन्होंने थ्रेशिंग कर रखी थी और तूड़ी उठाने वाले थे, उन्हें काफी नुकसान हुआ है। क्योंकि एकदम से बारिश शुरू हो गई और वे तूड़ी और काटी गई फसल को उठा नहीं पाए, जिससे किसानों की सारी मेहनत अंबर ने लील ली।
उधर, कांगड़ा, शिमला, कुल्लू और मंडी में बुधवार को ओलावृष्टि व अंधड़ का ऑरेंज और अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से हिमाचल में चार मई तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।
जानकारी के अनुसार बुधवार को अचानक मौसम के करवट बदलने से जहां चिलचिलाती गर्मी से लोगों को निजात मिली, वहीं इस बारिश ने अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दीं। इन दिनों गेहूं की फसल की कटाई का काम पूरे जोरों पर चल रहा है।

लेकिन अचानक हुई इस बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। शाहपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में कई किसानों ने फसल काटकर खेतों में ही रखी थी, जो आज हुई तेज बारिश के कारण पूरी तरह गीली हो गई है।
किसानों का कहना है कि फसल पक कर तैयार है और कुछ ही दिनों में कटाई का काम पूरा होने वाला था, लेकिन इस बारिश ने गेहूं के दाने खराब होने और काला पडऩे का खतरा बढ़ा दिया है। जिन किसानों की आधी कटी फसल खेतों में पड़ी थी, उनके लिए अब उसे सुखाना और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। साल भर पसीना बहाने के बाद जब फसल घर ले जाने का समय आया, तो कुदरत के इस प्रहार ने उन्हें संकट में डाल दिया है। फसल के गीले होने से न केवल अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि तूड़ी (पशु चारे) के खराब होने का भी डर है, जिससे पशुपालन पर भी असर पड़ सकता है। बारिश के बाद क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि खराब हुए मौसम और फसल के नुकसान का उचित आकलन किया जाए।

