खड्डों में फेंका जा रहा फोरलेन कम्पनी द्वारा खनन मटीरियल

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खड्डों में फेंके जा रहे मटीरियल में कई छोटे पौधे दवे,पेयजल स्कीमों को खतरा।

कोटला – व्यूरो चीफ

फोरलेन निर्माणाधीन कम्पनी द्वारा खनन मटीरियल को खड्डों में फेंका जा रहा। लोगों के घरों के नजदीक लगाए डंप

ज्वाली उपमण्डल के त्रिलोकपुर और सिहुनी क्षेत्र में सड़कों के किनारे खुदाई की गई पहाड़ियों का मलबा स्थानीय ब्रहल नदी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। खनन मटीरियल को खड्डों में डाला जा रहा है, जो इस प्राकृतिक जल निकाय में बहती है।

पठानकोट-मंडी राजमार्ग परियोजना को संभालने वाली कंपनी के पास कोई अधिकृत डंपिंग साइट नहीं है, इसलिए यह खुदाई की गई सामग्री को त्रिलोकपुर और सिहुनी क्षेत्रों की खड्डों में बहा रही है।

जानकारी के लिए बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है जिसमे बताया जग है कि किसी भी प्राकृतिक जल निकाय के पास बेस्ट मटीरियल की डंपिंग नहीं किया जा सकता।

पठानकोट-मंडी राजमार्ग पर चल रहे काम के दौरान स्थानीय अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन उल्लंघनों की जांच नहीं कर पाए हैं। इस मलवे के कारण त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत में कुछ ग्रामीण रास्ते, पुराने प्राकृतिक जल स्रोत और एक पाइप जलापूर्ति लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है।

स्थानीय लोगों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से खुदाई की गई सामग्री के निपटान की निगरानी करने अपील की है ताकि पेयजल स्कीमें बर्बाद होंने से बच सके।

वहीं दुर्गा दास, प्रधान, त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत ने प्रशासन से आग्रह किया है कि डंपिंग के लिए जगह का निरीक्षण कर बेस्ट मटीरियल को फेंका जाए साथ ही पहाड़ों की कटाई कर जो रास्ते बंद हो गए है ,ग्रामीणों के रास्तों को बहाल किया जाए।

उन्होंने बताया कि पंचायत में वाटर पंप हाउस कोटला वन परिक्षेत्र में बांध,एक पुरानी ‘बावली’ (प्राकृतिक जल निकाय) मलबे के नीचे दब गई थी। ग्राम पंचायत ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक, पालमपुर और स्थानीय प्रशासन को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें गांव के रास्तों, बावड़ियों और वाटर पंप हाउस की सुरक्षा की मांग की गई है। ज्वाली एसडीएम ने इन स्थलों का निरीक्षण करने के लिए पंचायत का दौरा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है।”

एसडीएम ज्वाली के बोल

ज्वाली के एसडीएम महिंदर प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने एनएचएआई के एक प्रतिनिधि के साथ घटनास्थल का मुआयना किया है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त ग्रामीण रास्तों और जल स्रोतों को बहाल करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि मैं खुद त्रिलोकपुर और सिहुनी क्षेत्रों में स्थानीय ब्रहल नदी का निरीक्षण करने के लिए जा रहा हूं और खुदाई की गई सामग्री की डंपिंग को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।”

डीएफओ के बोल:

वहीं, डीएफओ कुलदीप जम्वाल ने कहा, “विभाग को शिकायत मिलने के बाद निर्माण कंपनी को छोटे पौधों के नुकसान हेतु जुर्माने की वसूली के लिए एक डैमेज की रिपोर्ट भेजी गई है उन्होंने बताया कि मटीरियल की डंपिंग के लिए वन परिक्षेत्र में जगह दी गई है।

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