
नूरपुर – देवांश राजपूत
नूरपुर के वार्ड-3 निवासी निशांत गुप्ता ने क्षयरोग पर किए शोध में पहला स्थान हासिल किया है। निशांत वर्तमान में डाॅ. राधाकृष्णन मेडिकल काॅलेज हमीरपुर में बायोकैमिस्ट्री विभाग में ट्यूटर हैं।
उन्होंने बीआर अम्बेदकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जालंधर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बायोटैक्नोलॉजी में हालिया प्रगति पर शोध प्रस्तुत किया है।
सम्मेलन में अमेरिका, आयरलैंड, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, चीन और भारत के शोधकर्ताओं ने भाग लिया। निशांत गुप्ता को शोध पत्र के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
निशांत गुप्ता ने अपने शोध में यह पाया है कि किस इंसान को टीबी हो सकती है और किसे नहीं। यह बीमारी होने से पहले ही पता चल सकता है। इस बीमारी के लक्षण आने से पहले ही यदि किसी व्यक्ति को यह पता चल जाए तो समय रहते उसे इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
निशांत गुप्ता ने टीबी की संवेदनशीलता में सीडी 209 जीन की विभिन्नता का अभिप्राय शीर्षक के तहत अपना शोध सैमीनार में प्रस्तुत किया था तथा उनका यह शोध उत्तरी भारत व विशेषकर पंजाब के लोगों पर आधारित था।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग खांसी या अन्य लक्षण आने पर डाक्टर के पास जाते हैं जहां उनकी हिस्ट्री लेने पर चैक किया जाता है। यदि बीमारी न हो तो दूसरी दवाइयां देकर उन्हें भेजा जाता है।
यदि लोग इस रिसर्च के तहत यह पता करना चाहें कि उन्हें भविष्य में बीमारी हो सकती है या नहीं तो उनका बाकायदा खून लेकर डीएनए स्टडी किया जा सकता है। यदि स्थिति गंभीर हो तो उसे पहले ही आगाह किया जा सकता है।
निशांत की इस उपलब्धि पर पिता मदन गुप्ता व माता विनता गुप्ता ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि बेटे ने अपने शोध में पहला स्थान हासिल कर नूरपुर का नाम रोशन किया है। मेडिकल काॅलेज हमीरपुर की प्राचार्या डाॅ. सुमन यादव ने निशांत गुप्ता को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
