आक्रोश

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हिमखबर – डेस्क

मुझे आक्रोश है आज भी, उन लोगों से                                                                                    जिन्होंने मेरा साथ तब छोड़ा, जब मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी।

मुझे आक्रोश है आज भी, उन लोगो से                                                                                    जिन्होंने मेरी मोहब्बत को तब ठुकरया,
जब मुझे किसी के प्यार की जरूरत थी।

मुझे आक्रोश है आज भी, उन लोगो से
जिन्होंने अपना बनाकर, मुझे गले तो लगाया,                                                                                    पर मेरी पीठ पीछे खंजर भी चुभाआ।

मुझे आक्रोश है आज भी , उन लोगो से                                                                                  जिन्होंने मुझसे अपना मतलब निकाला
मगर मेरी जरूरत के समय मुझे ठुकराया।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक) राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गाहलिया
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233 – rajivdogra1@gmail.com

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