राजकीय महाविद्यालय रिड़कमार में “रचनात्मक लेखन” कार्यशाला का शुभारंभ ‌

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शाहपुर – नितिश पठानियां 

आज राजकीय महाविद्यालय रिड़कमार में “रचनात्मक लेखन कार्यशाला: हिंदी कहानी और कविता” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार प्रताप जरयाल जी रहे। मंच का संचालन प्रोफेसर आशा मिश्रा के द्वारा किया गया।

महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ मनोज कुमार के द्वारा मुख्य वक्ता का महाविद्यालय में आने पर जोरदार स्वागत किया गया। मुख्य वक्ता ने महाविद्यालय के बच्चों को अपनी हिंदी और पहाड़ी में स्वरचित कविताएं और ग़ज़लें प्रस्तुत की।

उन्होंने बताया कि कविता मन के भाव होते हैं और उन्हें लिखकर व्यक्त किया जा सकता है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को भी बच्चों के समक्ष सांझा किया।

उनके द्वारा महाविद्यालय को अपनी स्वरचित कविताओं , ग़ज़लों और कहानियों की पुस्तकों का संग्रह भी महाविद्यालय को दान स्वरूप भेंट की।

इसके बाद कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रोफेसर आशा मिश्रा ने कविता और कहानियों पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने कई मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला।

उनके द्वारा बताया गया कि किस प्रकार कविता और कहानी का लेखन किया जा सकता है जिससे कविता या कहानी अपना समाज में एक मुकाम बना सके।

इस कार्यशाला के प्रथम दिवस के अंत में प्रोफेसर हाकम चंद के द्वारा मुख्य वक्ता का महाविद्यालय में आने और बच्चों से महत्वपूर्ण जानकारी साँझा करने के लिए धन्यवाद किया गया।

ये रहे उपस्थित 

इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक वर्ग मौजूद रहे। जिसमें प्रोफेसर मनोज कुमार, प्रोफेसर हाकम चंद, प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय के सभी गैर-शिक्षक वर्ग भी मौजूद रहे।

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