पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ स्थानीय निधि लेखा समिति का फैसला, 50.68 करोड़ की कुल देनदारियों में से अभी महज 2.09 करोड़ की हुई वसूली
हिमख़बर डेस्क
पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों के पूर्व प्रतिनिधियों के खिलाफ लगी लेखा परीक्षण टिप्पणियों में देय राशि लंबित होने पर उन्हें चुनाव लडऩे की एनओसी नहीं मिलेगी।
हिमाचल विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने सरकार को उन व्यक्तियों को चुनाव लडऩे के लिए एनओसी प्रमाण पत्र जारी न करने के दिशा-निर्देश देने को कहा है, जिनके विरुद्ध लेखा परीक्षण टिप्पणियों में देय राशि लंबित है। इन्हें राशि की पूर्ण वसूली के बाद ही एनओसी देने को कहा गया है।
समिति ने लंबित लेखा आपत्तियों, अनियमित व्ययों की वसूली तथा समिति की संतुतियों में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है।

दरअसल शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के सभापति संजय रत्न ने की, जबकि समिति सदस्य संजय अवस्थी, मलेंद्र राजन तथा कुलदीप राठौर ने इसमें हिस्सा लिया।
समिति ने बैठक के दौरान पंचायती राज संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों से संबंधित लंबित लेखा आपत्तियों, अनियमित व्ययों की वसूली तथा समिति की संस्तुतियों में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
समिति ने पाया कि 31 मार्च, 2025 तक 50.68 करोड़ की राशि वसूली योग्य थी, जिसमें 31 दिसंबर, 2025 तक नौ माह की अवधि में मात्र 2.09 करोड़ रुपयों की राशि की वसूली/समायोजन किया जा सका, जबकि 48.58 करोड़ रुपए की राशि अब भी वसूली हेतु शेष है।
इसे समिति ने असंतोषजनक बताते हुए नाराजगी व्यक्त की। साथ ही समिति ने इसको लेकर सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया है।
समिति ने अपने समक्ष लंबित मामलों की भी समीक्षा की तथा सभी विभागों को निर्देश दिए कि समिति की संस्तुतियों पर की गई कार्यवाही की अद्यतन सूचना निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
स्थानीय निधि लेखा समिति ने विभिन्न विषयों पर दिनांक 26 मई, 2026 को मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार का मौखिक साक्ष्य करने का निर्णय भी लिया।

