जोगेंद्रनगर बस स्टैंड के वाटर कूलर से वायरस की तरह फैला था पीलिया, ली 6 लोगों की जान

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पीलिया संक्रमित मरीजों में पाया गया था हेपेटाइटिस ए वायरस, पांच विशेषज्ञों की रैपिड रिस्पांस टीम ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, टीमों ने 60,000 से अधिक लोगों की जांच की।

हिमखबर डेस्क                                                                

मंडी जिले के जोगेंद्रनगर में पीलिया बस स्टैंड के वाटर कूलर, एक प्राकृतिक जलस्रोत व हैंडपंप का दूषित पानी पीने से फैला है। जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है।

जलशक्ति विभाग के सैंपल भरने की तकनीक में कई कमियां पाई गई हैं। तीन मेडिकल कॉलेजों के पांच विशेषज्ञों की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) ने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। टीम ने पीलिया की रोकथाम के लिए कई सुझाव दिए हैं।

जोगेंद्रनगर में पीलिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) ने छह अगस्त को श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में माइक्रोबायोलाजी की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता गंजू के नेतृत्व में आरआरटी का गठन किया था।

इसमें आईजीएमसी शिमला व हमीरपुर मेडिकल कालेज के विशेषज्ञ भी शामिल थे। टीम के सदस्यों ने सात से नौ अगस्त तक जोगेंद्रनगर के पीलिया ग्रसित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। पानी की जांच के साथ मरीजों की हिस्ट्री खंगाली।

पीलिया संक्रमित मरीजों में हेपेटाइटिस ए वायरस पाया गया था। यह वायरस मल संक्रमित पानी में पाया जाता है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों की भूमिगत पाइप लाइनों क्षतिग्रस्त पाई गई थी। इन्हीं क्षतिग्रस्त लाइनों से गंदगी पेयजल के साथ लोगों के घरों, वाटर कूलर व अन्य सार्वजनिक नलों में पहुंचती रही।

जिला प्रशासन ने स्थिति बिगड़ती देख नेरचौक मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विशेषज्ञों से मदद मांगी थी। विशेषज्ञों ने उपमंडल के हर घर में हर व्यक्ति की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए आशा, आंगनबाड़ी, राजस्व विभाग व पंचायत प्रतिनिधियों की टीमें गठित की थी।

एक-एक टीम को 1000-1000 लोगों की जांच का जिम्मा सौंपा था, जिनमें पीलिया के लक्षण पाए गए थे उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। सीमावर्ती जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती मरीजों का आंकड़ा जुटाया गया। टीमों ने 60,000 से अधिक लोगों की जांच की।

प्रबंध निदेशक एनएचएम हिमाचल प्रियंका वर्मा के बोल

आरआरटी की रिपोर्ट मिल गई है। बस स्टैंड के वाटर कूलर, एक प्राकृतिक जलस्रोत व हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। पीलिया की रोकथाम के लिए जो सुझाव दिए गए हैं उन पर युद्धस्तर पर काम हो रहा है। अब स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है।

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