जरूरतमंदों के लिए 15100 बना सहारा, नि:शुल्क कानूनी सेवा उपलब्ध

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अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर भलेई मंदिर परिसर में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित, जिला एवं सत्र न्यायधीश अनुजा सूद ने की अध्यक्षता, निशुल्क कानूनी सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 15100 पर करें सम्पर्क

चम्बा – भूषण गुरुंग

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर भलेई माता मंदिर परिसर में विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायधीश अनुजा सूद ने की। शिविर में जिला एवं सत्र न्यायधीष ने श्रमिकों के आधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस हर वर्ष 1 मई को मनाया जाता है।

यह दिन दुनिया भर के मजदूरों और कामगारों के सम्मान, उनके अधिकारों और उनकी मेहनत को पहचान देने के लिए समर्पित है। उन्होंने इस दौरान श्रमिकों के अधिकारों जैसे उचित वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा पर उपस्थित लोगों को जागरूक किया।

जिला एवं सत्र न्यायधीष ने इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए आवश्यक है। जब महिलाएँ शिक्षित, जागरूक और सशक्त होंगी, तभी एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।

इस अवसर पर सचिव, विधिक सेवा प्राधिकरण एकांश कपिल ने विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि असहाय, अपंग, औरतों, बच्चों, औद्योगिक कामगार, मानसिक अस्वस्थ,अनुसूचित जाति व जनजाति से संबंधित, बाढ़, भूकंप, सूखा, जाति अत्याचार, औद्योगिक संकट, मानव दुर्व्यवहार, बेगार के शिकार व्यक्तियों को जिनकी समस्त साधनों से वार्षिक आय तीन लाख से कम हो उनको प्राधिकरण निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है। उन्होंने शिविर में मौलिक आधिकारों, मौलिक कर्तव्यों व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की।

उन्होंने कहा कि मुकदमों को तुरंत निपटाने के लिए प्राधिकरण राष्ट्रीय,राज्य,जिला तथा उपमंडल स्तर पर नियमित लोक अदालतों का आयोजन करता है। यदि उनके कानूनी अधिकारों का अतिक्रमण हो तो उनके समाधान के बारे में भी बताता है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी साझा करते हुए नागरिकों से किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए इस निशुल्क सेवा का लाभ उठाने का आवाहन किया।

ट्रेफिक मैजिस्ट्रेट डॉ.पार्थ जैन ने भी इस अवसर पर यातायात नियमों की महत्त्वता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, तेज गति से वाहन चलाने के खतरों, ओवरलोडिंग तथा नशे की हालत में ड्राइविंग के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला।

ट्रैफिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हमें सतर्क रहना होगा और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और दंड का प्रावधान भी है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सड़क संकेतों, पैदल यात्रियों के अधिकारों तथा सुरक्षित ड्राइविंग के मूलभूत सिद्धांतों के बारे में भी जानकारी दी गई।

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