टांडा अस्पताल की चौथी मंजिल की खिड़की से 27 वर्षीय युवती गिरी, मौके पर मची चीख-पुकार

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टांडा अस्पताल में 27 वर्षीय युवती के चौथी मंजिल की खिड़की से गिरने की घटना सामने आई है। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

कांगड़ा – राजीव जसबाल 

हिमाचल प्रदेश के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (टांडा) में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है।

भवारना थाना के अंतर्गत धीरा पुलिस चौकी क्षेत्र की रहने वाली 27 वर्षीय एक युवती ने अस्पताल की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी।

हैरानी की बात यह है कि युवती को बीती शाम ही संदिग्ध परिस्थितियों में जहर खाने के बाद गंभीर हालत में यहां भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उसे बचा भी लिया था, लेकिन सुबह उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट करते वक्त हुई घटना

टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि युवती को बीती शाम को कोई जहरीला पदार्थ खाने के चलते आपातकालीन स्थिति में अस्पताल लाया गया था।

उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे रातभर आईसीयू में रखा गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी तबीयत में सुधार भी होने लगा था।

सुबह करीब 5 बजे जब युवती की स्थिति स्थिर हो गई, तो उसे आईसीयू से मेडिसिन विभाग के जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा था।

इसी दौरान वह अचानक स्टाफ और परिजनों की नजरों से बचकर भागी और चौथी मंजिल की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी। ऊंचाई से गिरने के कारण युवती की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। डीएसपी कांगड़ा राजेश शर्मा ने बताया कि टांडा पुलिस से सूचना मिलते ही वह स्वयं मौके पर पहुंचे।

युवती के शव को कब्जे में लेकर टांडा अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। चूंकि मामला धीरा पुलिस चौकी का था, इसलिए धीरा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आगामी कार्रवाई की।

पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि युवती ने जहर क्यों खाया था और फिर अस्पताल में आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया।

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि करीब 7-8 साल पहले भी एक मरीज ने चौथी मंजिल के बरामदे से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

उस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने बरामदों और बालकनी में लोहे की जालियां लगवा दी थीं, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि, वार्डों की खिड़कियां जो जमीन से महज 3-4 फुट ऊंची हैं, बिना जाली के छोड़ दी गई थीं।

पहली बार किसी मरीज ने बरामदे की बजाय खिड़की से कूदकर जान दी है। इस हादसे के बाद अब अस्पताल प्रशासन पर सभी खिड़कियों में भी सुरक्षा जालियां लगाने का दबाव बढ़ गया है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

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