हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर एक उपभोक्ता का बिजली बिल चर्चा का विषय बन गया है। बिल की राशि देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए और उसने बिलिंग प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। मामले के सामने आने के बाद स्मार्ट मीटर और बिजली बिल की गणना को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में सुविधा और पारदर्शिता के दावों के साथ लगाए गए स्मार्ट बिजली मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए भारी परेशानी का सबब बन गए हैं। ऊना जिले के विकास खंड के तहत आने वाले चलोला गांव में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिलों में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हो गई है।
जिन घरों का बिल सामान्यतः 800 से 900 रुपए आता था, उन्हें अब हजारों रुपए के बिल थमाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है और वे विद्युत बोर्ड के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी का सबसे बड़ा उदाहरण चलोला निवासी सेवानिवृत्त इंस्पैक्टर मोहिंदर पाल सिंह का मामला है।
उन्होंने विद्युत बोर्ड के सहायक अभियंता को दी शिकायत में बताया कि उनके घर में केवल पति-पत्नी रहते हैं। इस महीने उनका बिल 7,025 रुपए आया है, जबकि इससे पहले उनका बिल अधिकतम 1,200 से 1,500 रुपए के बीच आता था।
हैरानी की बात यह है कि बिलिंग अवधि के दौरान वे अपनी पत्नी के साथ सोमनाथ और द्वारिका जी की यात्रा पर गए हुए थे। घर बंद होने और बिजली की खपत न के बराबर होने के बावजूद इतना भारी-भरकम बिल आने से वे स्तब्ध हैं।
यह समस्या किसी एक घर की नहीं है। गांव के कैप्टन गुरदयाल चंद, विधि चंद धीमान, पुन्नू राम, होशियार सिंह और ओमपाल सिंह सहित कई उपभोक्ताओं को 2 हजार से लेकर 12 हजार रुपए तक के बिल भेजे गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने मीटरों में बिल बिल्कुल सही आते थे। सेवानिवृत्त इंस्पैक्टर मोहिंदर पाल सिंह और अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बोर्ड ने स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कर वास्तविक खपत के आधार पर बिल दुरुस्त नहीं किए, तो वे मजबूर होकर बसाल स्थित एसडीओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी?
इस मामले पर विद्युत उपमंडल बसाल के सहायक अभियंता उदित शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायतें मिली हैं। मामले को लेकर बोर्ड के शिमला स्थित मुख्यालय से बात की गई है और तकनीकी खामी को दूर कर उपभोक्ताओं के बिल ठीक किए जा रहे हैं।

