
ज्वाली – अनिल छांगु
दो महीने के लंबे इंतजार के बाद मत्स्य आखेट से प्रतिबंध हटते ही पौंग झील में कश्तियों व मछुआरों के पहुंचने से झील गुलजार हो गई।
मछुआरों द्वारा सोमवार शाम को पौंग झील में जाल बिछा दिए गए थे तथा मंगलवार को मछुआरों ने सुबह झील में पहुंचकर जालों में फंसी हुई वड़ी मछलियों को निकालकर मत्स्य सोसायटीज में पहुंचाया। वंही अंडरसाइज मछलियों को कम रेट पर लोगों को चोरी-छिपे वेचते नजर आए।
जिससे मछुआरों के चेहरे खुशी से खिल उठे वंही इसी के साथ पौंग झील की मछली खाने के शौकीन भी अंडरसाइज मछली खरीदने सुबह से ही पौंग झील के किनारे पहुंच गए। और कुछ लोग अलग अलग मतस्य सोसायटी में पंहुच कर मछली खरीदते नजर आए
आपको वता दे कि पौंग झील में 2300 मछुआरे हैं जोकि मछली पकड़ने का कार्य कर अपनी आजीविका कमाते हैं तथा परिवार का पालन-पोषण करते हैं। झील खुलने से मछुआरा वर्ग काफी खुश है।
पौंग झील के अधीन मत्स्य सोसायटी हरसर, जवाली, फतेहपुर, गुगलाड़ा सिद्धाथा, नंदपुर, खटियाड़ इत्यादि में विभिन्न प्रजातियों की मछली मछुआरों द्वारा पहुंचाई गई।
