धरोहर गांव गरली पर बन रही डाक्यूमेंट्री फिल्म

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परागपुर – आशीष कुमार

आजकल धरोहर गांव गरली पर डाक्यूमेंट्री फिल्म का काम जोरों पर चल रहा है। सुबह से इस यूनिट ने अपना फिल्म शूट शुरू कर दिया। इस फिल्म के डायरेक्टर पीयूष शर्मा ने बताया कि इस पुराने गांव की संस्कृति, हस्त करघा, प्राचीन इतिहास इस क्षेत्र की स्थापना व यहां बनी भव्य हवेलियों को इस फिल्म में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाया जाएगा।

प्रोजेक्ट प्रभारी गीता दत्ता ने इस गांव को बहुत ही सुंदर तथा शांत बताया। वीडियोग्राफर सुशांत व फरहान से अपनी पूरी टीम के साथ एक स्पेशल इंटरव्यू के जरिए स्थानीय पब्लिक मोटीवेटर व शिक्षक मदन जीत से इस गांव के इतिहास के बारे में जाना।

हरभजन सिंह ने जहां इस क्षेत्र के बारे ने विस्तृत चर्चा की साथ साथ इस कार्यक्रम को भी कवर किया। कैमरामैन दानिश ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान शशि लता से भी एक इंटरव्यू के माध्यम से इस क्षेत्र की सभ्यता संस्कृति को जाना।

इसके साथ साथ गांव के बाज़ार और यहां के स्कूलों, पुराने मंदिरों लोगो के काम काज को अपने कैमरे ने कैद किया। पूर्व प्रधान धर्मवीर ठाकुर तथा अन्य लोगों ने भी यहां की संस्कृति तथा इस क्षेत्र के जीवन मेला के बारे में बात की।

दिल्ली से प्रमुख रूप से आई हुईं गीता दत्ता ने बारीकी से क्षेत्र का शोध कार्य करके इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म को अपनी यूनिट के साथ रिकार्ड किया और बताया कि भारत सरकार के सौजन्य से पुराने गांवों पर आधारित फिल्में हमारी फिल्म यूनिट द्वारा बनाई जाती हैं ताकि इस फिल्मों के माध्यम से इन गांवों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले।

सरकार के पर्यटन विभाग ने 1991 की पर्यटन नीति के आधार पर 9 दिसंबर 1997 को परागपुर और वर्ष 2002 को गरली को धरोहर गांव घोषित किया। 2002 में धरोहर के सरंक्षण को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का दर्ज दिया गया, जिससे इन गांवों में बनने वाले मकान धरोहर के अनुरूप बनें।

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