नहीं बढ़ेगी पे-कमीशन का विकल्प देने की तिथि, पढ़ें यह खबर

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15 अप्रैल है आखिरी डेट अब कर्मचारियों को तीन में से एक विकल्प चुनना ही होगा, अब तक 1.78 लाख कर्मचारियों को मिल चुका लाभ, बाकियों को जल्द

शिमला – जसपाल ठाकुर

वेतन आयोग के विकल्प के लिए अब सरकार कर्मचारियों के लिए डेट आगे नहीं बढ़ाएगी। 15 अप्रैल तक इसे रखा गया है और अब राइडर पर फैसला होने के बाद तीन विकल्पों में से एक विकल्प कर्मचारियों को चुनना ही होगा। ये विकल्प 2.59 तथा 2.25 का गुणांक और 15 फीसदी फ्लैट वेतनवृद्धि का है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में लोन पर निर्भरता को कम किया है। यह भारत सरकार द्वारा वेज एंड मीन्स एडवांस यानी अर्थोपाय अग्रिम की लिमिट को 60 फीसदी तक बढ़ाने के कारण हो पाया। इसी कारण राज्य सरकार ने महंगा लोन लेने से बची और 5400 करोड़ की मंजूरशुदा लिमिट होने के बावजूद यह राशि सरेंडर कर दी।

उन्होंने कहा कि अब तक 1.78 लाख सरकारी कर्मचारियों को पे-कमीशन मिल चुका है। इस महीने दी गई सैलरी का यह आंकड़ा है। करीब 350 करोड़ अतिरिक्त मासिक बिल अब सैलरी और पेंशन का बन रहा है। अब 30 हजार कर्मचारियों और 44 हजार पेंशनरों को पे-कमीशन मिलेगा। कर्मचारियों में विकल्प का मसला है और पेंशनरों का डाटा एजी आफिस से आया नहीं है। इसमें कुछ वक्त लगेगा।

सभी को नया पे-कमीशन देने के लिए 390 से 400 करोड़ का खर्च हर माह बढ़ेगा। यही हमारा आकलन था। प्रबोध सक्सेना ने कहा कि अब पे-कमीशन के एरियर का भुगतान होगा। यह सरकार को तय करना है कि कब से इसे देना है। इसके साथ ही फिर लोन पर फैसला होगा।

उन्होंने बताया कि पिछले साल सरेंडर की गई 5400 करोड़ की लोन लिमिट के बदले इस साल भारत सरकार कुछ लोन लिमिट बढ़ाएगी। हमें इसका लाभ होगा। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इसमें से कितनी राशि की अनुमति भारत सरकार इस वित्त वर्ष के लिए देती है।

गौरतलब है कि पिछले साल कोविड के कारण भारत सरकार ने वेज एंड मीन्स एडवांस की लिमिट को बढ़ा दिया था। यह लिमिट एक तरह से बैंक की सीसी लिमिट की तरह होती है। इससे सरकार की लोन पर निर्भरता कम हुई और दो बार आखिर में जब लोन लेने के लिए बिड की गई, तो ब्याज दर ज्यादा होने के कारण इस बिड को ड्राप कर दिया गया।

वेतन विसंगति कमेटी की बैठक जल्द

राज्य सरकार द्वारा बनाई गई वेतन विसंगति कमेटी की पहली बैठक इसी सप्ताह हो रही है। कमेटी ने अब तक आए ज्ञापनों की छंटनी कर ली है। इनमें से विभागीय स्तर के मामले अलग कर दिए हैं और बाकी आवेदन विचारार्थ रखे हैं। कमेटी को रिपोर्ट देने के लिए सरकार ने 30 अप्रैल तक का समय दिया है।

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