किसी भी समय गिर सकता पटवारखाने का भवन,बादलों की गर्जना के साथ पटवारखाना भवन भी थरथरा जाता

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ज्वाली- अनिल छांगू

जवाली उपमंडल के अधीन पटवारखाना जवाली का भवन काफी जर्जर स्थिति में चल रहा है। पटवारी सहित पटवारखाना जवाली में अपना कार्य करवाने हेतू आने वाले लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर बैठते हैं।

भवन के अंदर बिजली की तारें भी उलझी पड़ी हैं यानी बिजली कि वायरिंग भी काफी खराब है। जैसे-तैसे जुगाड़ लगाकर बिजली की तारों को लटकाया गया है। पटवारखाना के अंदर बैठने को भी पर्याप्त जगह नहीं है।

बादलों की गर्जना के साथ ही जर्जर पटवारखाना का भवन भी थरथरा जाता है तथा भवन कभी भी गिर सकता है। बारिश होने के कारण होने पर भवन की दीवारों में सीलन होने के चलते बिजली की अर्थिंग हो सकती है।

किसी को भी करंट लग सकता है। इस पटवारखाना का निर्माण करीबन 40-42 साल पहले हुआ था । इसका क्षेत्रफल 498 हेक्टेयर है तथा सुनेहड़, जवालीखास, फारियां, करडियाल, ठंगर के 6 गांव निर्भर हैं।

यह पटवारखाना सबसे पुराना है लेकिन इसकी जर्जर हालत की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। इसके साथ ही निर्मित शौचालय की हालत भी काफी खराब है। दीवारों में दरार आ चुकी है। इसको बनवाने की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है।

बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि जर्जर पटवारखाना जवाली के भवन को गिराकर नया भवन बनवाया जाए।

क्या कहते हैं तहसीलदार सन्त राम नागर

इस संबंध में तहसीलदार जवाली संत राम नागर ने बताया कि जवाली पटवारखाने के भवन के लिए 2014 में 4 लाख रुपए मंजूर हो चुका है लेकिन लोक निर्माण विभाग द्वारा अभी तक भवन को अनसेफ घोषित नहीं किया गया है। जैसे ही भवन को अनसेफ घोषित किया जाएगा तो नया भवन बनवाया जाएगा।

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