कांग्रेस को नसीहत देने से पहले उचित होता कि मुख्य सचेतक व अपने पिता को भाषा शैली पर नियंत्रण रखने की नसीहत देते समोट वार्ड के ज़िला परिषद् सदस्य अभिमन्यु: अर्जुन कपूर

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भटियात, भूषण गुरूंग

कांग्रेस पार्टी पर की गई टिप्पणी के जवाब में आज भटियात कांग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक अर्जुन कपूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पर और पार्टी की कार्यशैली पर व्यान देने से पहले उचित होता कि मुख्य सचेतक हिमाचल प्रदेश विधान सभा के सुपुत्र अभिमन्यु जरयाल अपने पिता को आम जनता से बार्तालाप की भाषा को दुरुस्त करने की नसीहत दी।

उनको भी यह जानकारी होनी चाहिए कि जिस बस स्टैंड चुवाडी पर खड़े होकर मुख्य सचेतक श्री विक्रम सिंह जरयाल जी दुकानदार को धमाका रहे थे।

उस सव डिपो का उद्दघाटन पूर्व उद्योग मंत्री हिमाचल प्रदेश स्वर्गीय श्री किशोरी लाल जी के व सांसद श्री शांता कुमार जी के कार्यकाल में हुआ था। भाजपा आज तक चुवाडी सव डिपु पर लगे फट्टे के नाम पर भटियात की जनता को गुमराह करती आ रही है। जबकि विधान सभा के माध्यम से जब सव डिपू की बात पूछी गई तो यह मात्र एक जनता को गुमराह करने के लिए घोषणा निकली।

उन्होंने कहा कि वह इस बात को ना भूले कि श्री कुलदीप सिंह पठानियाँ जी जिनकी भट्टियात के विकास में अहम भूमिका रही है। समस्त भटियात की जनता भली भांति जानती है कि भटियात विधान सभा क्षेत्र का विकास तभी हुआ है। जब कांग्रेस की सरकार प्रदेश व भटियात में आई है।

भाजपा के शासन काल में मात्र कांग्रेस पार्टी व पूर्व में रहे विधायक कुलदीप सिंह पठानिया जी के अथक प्रयासों द्वारा किए गए कार्यों की उदघाटन पटिकाओ को तोड़ कर अपनी पट्टीकाओ को लगने की होड़ लगी है।

नौ सालों के बाद फॉरेस्ट क्लेरेंस करवाने का जशन और अपनी नाकामयाबी का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। लेकिन विकास के नाम पर विधायक का योगदान शून्य रहा है। शिक्षा,स्वस्थ, सड़क,बिजली,पानी, युवाओं को रोजगार किस किस सेक्टर में कितना विकास हुआ है।

विधायक खुद भी आंकलन करें भटियात की जनता तो कर भी रही है और इस कुशासन से मुक्ति का सम्पूर्ण मन बना चुकी है। अब भटियात की जनता को उनसे हुई बहुत बड़ी चूक का आभास हो चुका है।

ज्ञात रखे कि विधायक चुने जाने के बाद वह किसी दल विशेष के नहीं अपितु समस्त जनता के होते हैं। लेकिन विरोधी दल के व्यक्ति के साथ जो व्यवहार करते हो यह निंदनीय है।

इस प्रकार कि भाषा का प्रयोग विधायक व मुख्य सचेतक के गरिमामय पद पर आसीन हो कर करना उचित नहीं। यह लोकतंत्र है यहां कोई स्थायी नहीं है।

वैसे भी विधायक महोदय विकास कार्य नहीं करवा पा रहे साथ में जनता के बीच आचरण भी सही नहीं होगा तो इसका खामियाजा अगले चुनावों में भुगतने को भाजपा व विधायक तैयार रहे।

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