शाहपुर – नितिश पठानियां
सनातन धर्म में हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभिन्न तिथियां पड़ती हैं, इन तिथियों को कई तरह के त्योहार से भी जोड़ा गया है। ऐसे में 28 अप्रैल मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार होने के चलते इसे भौम प्रदोष व्रत का नाम दिया गया है।
इस व्रत को करने से भक्त को भगवान शिव और हनुमान की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत करने से मंगल ग्रह से जनित पीड़ा से भी भक्तों को मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव और भगवान हनुमान की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है।
आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा के बोल
शाहपुर के आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 अप्रैल मंगलवार को शाम को 6 बजकर 51 मिनट पर होगी। वहीं, त्रयोदशी तिथि का समापन अगले दिन 29 अप्रैल बुधवार को शाम को 7 बजकर 51 मिनट पर होगा।
ऐसे में पहले दिन प्रदोष काल लगने के चलते 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन व्रत करने से भक्त को भगवान शिव और राम दूत हनुमान की कृपा मिलती है। प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल यानी कि शाम के समय माना गया है।

ऐसे में 28 अप्रैल मंगलवार के दिन शाम को 6 बजकर 51 मिनट से लेकर 7 बजकर 39 मिनट तक की अवधि पूजा के लिए शुभ है। शास्त्रों के अनुसार सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद की अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है।इस दौरान शिवजी की पूजा का विधान शास्त्रों में लिखा गया है।
भक्त को भगवान शिव और माता पार्वती का आरती करने और व्रत कथा का पाठ करने के बाद किसी जरूरतमंद को अपने सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। इसके साथ ही, इस बार मंगलवार को प्रदोष व्रत पड़ने से इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना भी बहुत शुभ फलकारी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है।
भौम प्रदोष का व्रत कैसे रखें ?
- व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करें।
- सबसे पहले भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- उसके बाद पूजा घर को अच्छी तरह साफ करें और चारों ओर गंगाजल का छिड़काव कर लें।
- व्रत के दिन भक्त भगवान शिवजी का विधि-विधान से पूजा करें।
- पूरे दिन उपवास करने के बाद सूर्यास्त से पूर्व दोबारा स्नान या स्वच्छ होने के पश्चात पूजा घर में पूजा करें।
व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा कैसे करें ?
- शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जल, शहद, दही आदि से अभिषेक करें।
- उसके बाद भोलेनाथ को बेलपत्र, धूप-दीप, पुष्प आदि भी अवश्य अर्पित करें।
- साथ ही, मां पार्वती की पूजा करें।
- फिर शिवजी के मंत्रों का जाप करें और उन्हें भोग अर्पित करें।

