संघर्ष की बर्फ पिघली: लाहौल के किसानों ने ग्लेशियर हटाकर खेतों में लौटाया जीवन

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लाहौल के किसानों ने 10 फीट बर्फ चीरकर खेतों तक पहुंचाया पानी, कुहल के ऊपर गिरा था ग्लेशियर का 200 मीटर बड़ा हिस्सा, लाहौल घाटी में कृषि-बागवानी कार्य के लिए घाटी के हर गांव में किसान सिंचाई के लिए कुहल की मरम्मत में जुटे

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति की जोबरंग पंचायत के राशेल गांव में ग्रामीणों की एकजुटता से एक बार फिर से सिंचाई कुहल बहाल हो गई है। ग्रामीणों के द्वारा सिंचाई कुहल के ऊपर गिरे करीब 10 फीट ऊंचे और 200 मीटर लंबे ग्लेशियर को काटा और उसके बाद पानी की सप्लाई अब लोगों के खेतों तक पहुंचना शुरू हुई।

वर्तमान में लाहौल घाटी में किसानों के द्वारा कृषि कार्य शुरू किए गए हैं और खेतों में सिंचाई के लिए भी पानी की काफी आवश्यकता रहती है। ऐसे में ग्रामीणों ने एक बार फिर से एकजुटता का परिचय देते हुए खेतों तक पानी पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

राशेल गांव निवासी इंद्रजीत भानू ने बताया कि इस सर्दी में बर्फबारी के दौरान भारी ग्लेशियर का मलबा उनके सिंचाई कुहल के ऊपर आ गिरा था। ऐसे में ग्रामीणों ने करीब तीन घंटे तक ग्लेशियर के मलबे को काटकर कुहल को साफ किया और खेतों तक पानी पहुंचाया गया है।

हर साल राशेल गांव में बर्फबारी के दिनों में यहां पीने के पानी की परेशानी भी कम नहीं रहती। हर साल सर्दियों में दो से तीन महीने तक कड़ाके की ठंड से इनके पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन जम जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी कई दिक्कतों से जूझना पड़ता है।

जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोम देव योकी ने बताया कि सर्दी खत्म होते ही कृषि सीजन शुरू होने पर फसल बुआई और सिंचाई को लेकर कुहलों से पानी पहुंचाने की जद्दोजहद शुरू हो जाती है। कई जगहों पर बर्फबारी के कारण पहाड़ों से ग्लेशियर का मलबा कुहलों पर गिर जाता है।

जिसे हटाना ग्रामीणों के लिए हर साल की लड़ाई बन गई है लेकिन उसके बावजूद भी ग्रामीणों का हौसला कम नहीं हुआ और वह लगातार कुहल की सफाई कर अपने खेतों तक पानी पहुंचाने का काम जारी रखते हैं। उन्होंने बताया कि लाहौल घाटी में बारिश बहुत कम होती है। इसलिए यहां कृषि एवं बागवानी पूरी तरह सिंचाई पर ही निर्भर है। इस समय घाटी के हर गांव में किसान सिंचाई के लिए कुहल की मरम्मत का कार्य कर रहे हैं।

गौरतलब है कि लाहौल घाटी में सर्दियों के दौरान भी जब पेयजल लाइन जम जाती है तो उस दौरान भी लोग मिलकर पेयजल लाइन को बहाल करने में अपनी भूमिका निभाते हैं। अब कृषि सीजन शुरू होने पर खेत खलिहानों की सिंचाई के लिए ग्रामीण ग्लेशियर के मलबे से जंग लड़ते नजर आए। ग्रामीणों को 200 मीटर लंबे और 7 से 10 फीट ऊंचे ग्लेशियर काटकर कुहल से पानी खेतों तक लाना पड़ा। 14 घरों की आबादी वाले इस राशेल गांव के लोगों की मेहनत हमेशा से प्रेरणादायक रही है।

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