हिमखबर डेस्क
पहाड़ों में बहते प्राकृतिक जल स्रोत हमेशा से लोगों की प्यास बुझाते आए हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इन स्रोतों की स्वच्छता को लेकर चिंता भी बढ़ी है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन सोलन ने एक अहम पहल शुरू की है।
अब जिले के पारंपरिक और प्राकृतिक जल स्रोतों के पास आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि लोगों को प्राकृतिक स्रोतों के साथ-साथ पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित पेयजल भी मिल सके।
जिला प्रशासन ने इस दिशा में जल शक्ति विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का मानना है कि जिले में कई ऐसे प्राकृतिक स्रोत हैं जिनका उपयोग आज भी बड़ी संख्या में लोग पीने के पानी के लिए करते हैं।
यदि इन स्थानों के पास आरओ प्लांट स्थापित किए जाते हैं तो लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला पानी मिल सकेगा और जल जनित बीमारियों का खतरा भी कम होगा।
फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है। उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा के निर्देशों के बाद अब इसकी जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग को सौंपी गई है।
विभाग का पहला लक्ष्य जिले में ऐसे सभी प्राकृतिक जल स्रोतों की पहचान करना है, जहां से बड़ी संख्या में लोग पानी लेते हैं। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन-किन स्थानों पर आरओ प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं।
विभाग यह भी आकलन करेगा कि इन प्लांटों की स्थापना में कितना खर्च आएगा और उनका रखरखाव किस प्रकार किया जाएगा।
उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को पारंपरिक जल स्रोतों के पास आरओ प्लांट स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
बीमारियां रोकने में मदद
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई गांवों में आज भी लोग प्राकृतिक जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं, लेकिन कई बार पानी की स्वच्छता को लेकर चिंता बनी रहती है।
यदि इन स्रोतों के पास आरओ प्लांट स्थापित किए जाते हैं तो लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सकेगा। ग्रामीणों का मानना है कि इससे पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

