26 जनवरी की परेड के बजाय भारत पर्व में चयनित हुई झांकी, वर्ष 2020 के बाद नहीं मिल पाया है मौका
शिमला – नितिश पठानियां
लगातार चौथे साल गणतंत्र दिवस 2024 की परेड में राजधानी दिल्ली के कत्र्तव्य पथ पर हिमाचल की झांकी देखने को नहीं मिलेगी। भाषा एंव संस्कृति विभाग की ओर से हिमाचल की झांकी के लिए इस बार भी आवेदन किया गया था, लेकिन पूरा प्रोसेस में अंतिम राउंड में झांकी शामिल नहीं हो पाई।
हांलाकि भारत पर्व में हिमाचल की झांकी को शामिल होने का मौका मिला है। इसमें रशियन पेंटर निकोलस रोरिक जिनकी इस साल 150वीं जयंति थी उसे झांकी के लिए शामिल किया था।
निकोलस रोरिक एक प्रसिद्ध रूसी-अमरीकी चित्रकार, लेखक, और दार्शनिक थे। वह अपनी एशियाई और हिमालयी चित्रकला के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। निकोलस रोरिक का जन्म 1874 में रूस में हुआ था।
उन्होंने अपनी कला की शिक्षा रूस और यूरोप में प्राप्त की। बाद में, उन्होंने एशिया की यात्रा की और हिमालय, तिब्बत, और मंगोलिया में अपनी कला को प्रभावित किया।
रोरिक की चित्रकला में एशियाई संस्कृति, दर्शन, और प्राकृतिक सौंदर्य का मेल है। उनकी पेंटिंग्स में हिमालय की चोटियों, तिब्बती मठों, और मंगोलियाई स्टेप्स के दृश्य शामिल हैं।
निकोलस रोरिक को उनकी कला और सांस्कृतिक योगदान के लिए विश्वभर में स मानित किया गया है। वह एक सच्चे विश्व नागरिक थे ,जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों को जोडऩे का प्रयास किया है।
भारत पर्व में उनकी झांकी की झलक देखनेे को मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत किसी भी राज्य की झांकी को तीन चरण में होने वाली छंटनी प्रक्रिया के दौरान बाहर नहीं किया जाएगा।
राज्य जिस भी वर्ष के लिए अपनी झांकी को शामिल करने की प्राथमिकता देंगे, केंद्र सरकार उस राज्य की झांकी और बेहतर बनाने में मदद देगा। नए फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के ग्रुप तैयार किए हैं।
पंकज ललित, निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग के बोल
हिमाचल की झांकी भारत पर्व में शामिल होगी। इसमें एक रशियन पेंटर द्वारा बनाई चित्रकला पर आधारित ये झांकी है।

