सिरमौर – नरेश कुमार राधे
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित रेणुका जी बांध परियोजना को गिरी नदी पर बनाया जाना है। 27 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला रखी थी।
परियोजना का उद्देश्य न केवल दिल्ली की जल आपूर्ति सुनिश्चित करना था, बल्कि हिमाचल प्रदेश में बिजली उत्पादन और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाना भी था। दो साल बीतने के बाद भी परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोग निराश हैं।
रेणुका जी बांध परियोजना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती थी। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोगों और युवाओं को इस परियोजना से बहुत उम्मीदें थीं, परंतु देरी के चलते उनके लिए रोजगार और विकास के अवसर धूमिल होते नजर आ रहे हैं।
रेणुका जी बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को वर्ष 2019 में 6946.99 करोड़ रुपए की लागत पर स्वीकृत किया गया था। इसमें 148 मीटर ऊंचा रॉक फिल बांध और 24 किलोमीटर लंबा जलाशय बनाना प्रस्तावित था।

परियोजना दिल्ली की लगभग 40 प्रतिशत पेयजल जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश को 40 मेगावाट बिजली (40 MW) भी प्रदान करती। इसके अलावा परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 13.14 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होने की संभावना थी। इससे स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता।
बता दें कि बांध स्थल नाहन से लगभग 40 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध रेणुका जी तीर्थ स्थल के पास स्थित है। गिरी नदी की विद्युत क्षमता का दोहन करने के लिए प्रारंभिक जांच का कार्य 1942 में तत्कालीन पंजाब सरकार द्वारा शुरू किया गया था।
1964 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने दो परियोजनाओं की जांच शुरू की, और 1970 के दशक में गिरि जलविद्युत परियोजना पर काम शुरू हुआ और इसे समय पर पूरा कर लिया गया।
रेणुका जी बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को जल संसाधन विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति द्वारा वर्ष 2000 में 1224.64 करोड़ रुपए की लागत पर स्वीकृत किया गया था, लेकिन कुछ कारणों से परियोजना पर प्रगति नहीं हो सकी।
इसके बाद वर्ष 2015 में इस परियोजना की डीपीआर को फिर से स्वीकृति मिली, इस बार इसकी अनुमानित लागत 4596.76 करोड़ रुपए थी। लेकिन लाभार्थी राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय समझौते के न होने के कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया।
मौजूदा हालात में परियोजना का निर्माण अगले एक दशक तक भी पूरा होने की उम्मीद पर संशय है,क्योंकि 24 किलोमीटर लंबे जलाशय में जल स्तर लेकर कुदरत पर ही निर्भर रहना होगा।

