मिनी हरिद्वार ज्वाली अनदेखी का शिकार

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बैसाख संक्रांति को हजारों की संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु, महिलाओं के नहाने को स्नानागार तक नहीं

ज्वाली – अनिल छांगू

उपमंडल ज्वाली के अधीन देहर खड्ड किनारे मिनी हरिद्वार है तथा इस स्थल पर विशेष पर्वों को दूरदराज से लोग नहाने आते हैं व पुण्य कमाते हैं। इस पावन स्थल की तुलना हरिद्वार से की जाती है तथा लोग किसी परिचित की मृत्यु उपरांत अस्थियों का विसर्जन करने भी आते हैं।

बैसाख संक्रांति को मिनी हरिद्वार ज्वाली में हजारों की संख्या में दूरदराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूरदराज से नहाने के लिए आते हैं। विडंबना है कि आजतक यह स्थल राजनीतिक अनदेखी का शिकार होता रहा है।

इस स्थल पर महिलाओं को नहाने के लिए स्नानागार नहीं बन पाए हैं। महिलाओं को मजबूरन खड्ड में कपड़ों सहित नहाना पड़ता है। अस्थि विसर्जन घाट नहीं बन पाया है तथा ठहरने के लिए कोई भी सराय नहीं है। इस स्थल पर सरोवर व स्नानागार बनाए जाने चाहिए और अस्थि विसर्जन घाट का निर्माण होना चाहिए।

मिनी हरिद्वार ज्वाली का इतिहास

इस स्थल को पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान बनाया गया था। कहा जाता है कि पांडवों ने यहां पर अढ़ाई पौढिय़ों का भी निर्माण किया गया था। धरती के अंदर जाने के लिए कुआं भी निर्मित किया गया था। भीम ने एक कुदाला मारकर सरोबर का निर्माण किया था तथा कुदाला के साथ जो मिट्टी रह गई थी उसको झकझोर कर फेंका था जोकि पास ही जाकर गिरी व टिल्ला का रूप धारण कर लिया जिसे भीम टिल्ला कहा जाता है।

यह टिल्ला इतना मजबूत है कि इससे एक पत्थर तक उखाडऩा मुश्किल हो जाता है। अढ़ाई पौढियां अनदेखी के कारण बह चुकी हैं तथा कुआं भी मिट्टी से भर चुका है। सरोवर भी खड्ड बन चुका है। स्नानागार निर्मित नहीं हो पाए हैं। इस स्थल पर 13 अप्रैल बैसाख संक्रांति को महास्नान होगा तथा 14 अप्रैल को जिला स्तरीय बैसाखी मेला होगा।

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