चैत्र नवरात्र… मुद्रिका बस चलाना भूला मंदिर प्रशासन

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काँगड़ा – राजीव जस्वाल

चैत्र नवरात्र के दौरान मां के भक्तों के लिए मंदिर प्रशासन नि:शुल्क मुद्रिका बस सेवा चालू करनी भूल गया है। नतीजतन यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले सालों में बाण गंगा से तहसील चौक तक माता के भक्तों को लाने ले जाने के लिए मुद्रिका बस सेवा चालू की गई थी, जिसने मां के श्रद्धालुओं को राहत दी थी।

दरअसल मां के श्रद्धालु जिन बसों में आते हैं, उन्हें बाण गंगा स्थल पर खड़े करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शहर के भीतर बसों की भीड़ न बढ़े। जाहिर है बसें शहर में आने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिस वजह से पुलिस को और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

लिहाजा पुलिस प्रशासन ने बसों को बाण गंगा स्थल पर खड़े करने के निर्देश दिए हैं। अब बाण गंगा से यात्रियों को तहसील चौक तक आने में भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है ।ऐसे में तिपहिया वाहनों की पौ बारह है।

यात्रियों का कहना है कि नि:शुल्क मुद्रिका बस सेवा अच्छी थी, लेकिन उन्हें मलाल है कि यह सेवा इस वर्ष शुरू नहीं की गई। अलीगढ़ से आए माधव राम ने बताया कि पिछले सालों में वे यहां आते थे, तो उन्हें बाणगंगा से मंदिर जाने में कोई दिक्कत नहीं आई। अब तिपहिया वाहनों पर महंगे किराए देकर मां के दर्शन के लिए पहुंचना पड़ रहा है।

दीगर है माता के यह भक्त सैकड़ों किलोमीटर दूर से यहां मां के दर्शनों के लिए आते हैं, उनकी माता वज्रेश्वरी देवी के प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है। लिहाजा उन्हें सुविधाएं उपलब्ध करवाना मंदिर प्रशासन का दायित्व है।

इस सिलसिले में चैत्र नवरात्रों से पहले मंदिर प्रशासन की बैठकें पहले आयोजित की जाती हैं, जो कि इस बार भी आयोजित की गई थी, लेकिन नि:शुल्क मुद्रिका बस सेवा चालू करना मंदिर प्रशासन भूल गया।

मंदिर के पूर्व ट्रस्टी व वरिष्ठ पुजारी पंडित राम प्रसाद शर्मा के बोल

मंदिर के पूर्व ट्रस्टी व वरिष्ठ पुजारी पंडित राम प्रसाद शर्मा का कहना है कि यह बड़ी चूक है। उनका कहना है कि यात्रियों को नि:शुल्क बस सेवा की सुविधा मिलनी चाहिए। पंडित राम प्रसाद शर्मा का कहना है कि यह भक्त बड़ी दूर से मां के दर्शनों के लिए आते हैं और तमाम सुविधाएं उन्हें मिलनी चाहिए।

यह सुविधा न होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि मां के श्रद्धालुओं के चढ़ावे से ही यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाती हैं। लिहाजा इसके लिए सचेत रहना चाहिए।

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