सिरमौर में “कोली समाज” दो गुटों में विभाजित, रविवार को राजगढ़ व नाहन में चुनाव

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नाहन,14 अक्टूबर – नरेश कुमार राधे 

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद में “कोली समाज” दो धड़ो में बंटता नजर आ रहा है। समाज के मौजूदा प्रधान ने जिला स्तर के चुनाव राजगढ़ में आयोजित करने का निर्णय लिया था, लेकिन नाहन, शिलाई व पांवटा साहिब मंडलों को ये फैसला रास नहीं आया।

ऐसे में आसार यह भी पैदा हो गए हैं कि कोली समाज की सिरमौर में रविवार को समांतर इकाइयां भी गठित हो सकती हैं।

शनिवार को नाहन, शिलाई व पांवटा साहिब मंडलों के अध्यक्ष दीपचंद, सुनील वर्मा व धनवीर चौहान ने एक प्रेस विज्ञप्ति में राजगढ़ में हो रहे चुनाव के निर्णय के बहिष्कार का ऐलान किया है।

साथ ही यह भी ऐलान किया है कि तीनों मंडलों के अध्यक्ष नाहन में जिला कार्यकारिणी का चुनाव रविवार को सुबह 10:00 बजे शाही मिष्ठान भंडार में आयोजित करेंगे। समाज के लोगों से चुनाव में हिस्सा लेने का आग्रह किया गया है।

उधर, राजगढ़ में भी रविवार को समाज के चुनाव हो रहे हैं, चूंकि सिरमौर में कोली समाज का खास प्रभाव है। लिहाजा समाज के दो गुटों में विभाजित होने का सियासी लाभ भी राजनीतिक दलों द्वारा तलाशा जा सकता है।

आपको बता दें कि इसे पहले कोली समाज के चुनाव में इस तरह की धड़ेबाजी सामने नहीं आई हैं। तीन मंडलों के अध्यक्षों ने कहा कि मौजूदा इकाई का कार्यकाल में 2022 में पूरा हो चुका है, लेकिन चुनाव में टालमटोल की जाती रही।

समाज के एक गुट ने नाहन में चुनाव करवाने का निर्णय लिया है तो दूसरी तरफ समाज के मौजूदा जिला अध्यक्ष राजगढ़ में चुनाव करवा रहे हैं। जिला अध्यक्ष का कहना था कि नाहन में चुनाव कराने को लेकर कोई बातचीत नहीं की गई थी।

दीगर है कि सिरमौर के पांच विधानसभा क्षेत्रों में दो हल्के रेणुका जी व नाहन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसके अलावा कोली समाज का प्रभाव न केवल “सिरमौर” बल्कि पड़ोसी जिला सोलन में भी समाज की खासी पकड़ है। नाहन विधानसभा में भी बिरदारी निर्णायक भूमिका निभाती है।

समाज के विभाजित होने पर राजनीतिक दलों की भी नज़रें टिकी हुई है। शिमला संसदीय क्षेत्र भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। सीट पर भी हमेशा से कोली समाज का ही प्रभाव रहा है।

सोलन व सिरमौर से ही प्रत्याशियों को जीत मिलती रही है। मौजूदा सांसद सुरेश कश्यप का ताल्लुक भी कोली बिरादरी से है।

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